कौशांबी जिले में भाजपा से जुड़े विवाद ने अब पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला पूर्व मंडल अध्यक्ष राममिलन चौधरी (काजू) और भाजपा जिला मीडिया प्रभारी ज्ञानेन्द्र साहू के बीच कथित विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। राममिलन चौधरी का आरोप है कि जिला अध्यक्ष की सोशल मीडिया पोस्ट पर की गई टिप्पणी को लेकर उन्हें फोन किया गया और बातचीत के दौरान कथित तौर पर धमकी दी गई। इस मामले से जुड़ा एक ऑडियो और आरोपों से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में होने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मंडल अध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने मामले में शिकायत दी, लेकिन 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई। इसी को लेकर उन्होंने संदीपनघाट SHO की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। राममिलन का आरोप है कि कार्रवाई आगे बढ़ाने के बजाय उन पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। मामले में अब स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायत लंबित है तो जांच की स्थिति क्या है और शिकायतकर्ता को अब तक क्या जानकारी दी गई है। वहीं कानूनी प्रक्रिया और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक विवाद से निकलकर पुलिस कार्रवाई और प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का विषय बन गया है।

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