नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर अब बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस ने अदालत में दावा किया है कि यह विरोध प्रदर्शन नेपाल में हाल के दिनों में हुए तथाकथित “Gen-Z आंदोलन” से प्रेरित था। पुलिस के मुताबिक, यह प्रदर्शन पूर्व नियोजित था और इसका उद्देश्य समिट के दौरान माहौल को बाधित करना था। राजधानी के एक प्रमुख सम्मेलन स्थल पर आयोजित इस एआई समिट में देश-विदेश के कई नीति-निर्माता, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। कार्यक्रम का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की रणनीति, निवेश और वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाना था। इसी दौरान यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर अचानक शर्टलेस होकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे कुछ समय के लिए कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न हुआ। दिल्ली पुलिस ने घटना के बाद चार यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। पुलिस ने अदालत में पेशी के दौरान कहा कि यह कोई अचानक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड और नेपाल में हुए जेन-Z प्रोटेस्ट से प्रेरित एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने जानबूझकर ऐसा तरीका चुना जिससे मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके और कार्यक्रम की गरिमा प्रभावित हो। अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस ने पांच दिन की रिमांड की मांग की, ताकि आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जा सके कि क्या इस विरोध के पीछे कोई व्यापक संगठनात्मक रणनीति थी या अन्य लोग भी इसमें शामिल थे। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को स्वीकार करते हुए चारों आरोपियों की जमानत याचिका नामंजूर कर दी और उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस का यह भी कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल संचार की जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या किसी अंतरराष्ट्रीय आंदोलन या ऑनलाइन अभियान से सीधा समन्वय था। हालांकि बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि यह एक शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक विरोध था, जिसका उद्देश्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना था, न कि किसी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था फैलाना। राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे युवाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बताया है, जबकि सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह का प्रदर्शन देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने विरोध प्रदर्शनों की शैली को बदल दिया है। जेन-Z पीढ़ी अक्सर प्रतीकात्मक और दृश्यात्मक तरीकों का इस्तेमाल करती है, जिससे संदेश तेजी से वायरल हो सके। ऐसे में पुलिस का यह दावा कि प्रदर्शन नेपाल के जेन-Z आंदोलन से प्रेरित था, इस बात की ओर संकेत करता है कि विरोध के तौर-तरीके अब सीमाओं से परे जाकर एक-दूसरे को प्रभावित कर रहे हैं। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में पुलिस की पूछताछ से और तथ्य सामने आ सकते हैं। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि अदालत में आगे की सुनवाई में क्या रुख अपनाया जाता है और क्या आरोपियों को राहत मिलती है या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि लोकतांत्रिक ढांचे में विरोध की सीमा और स्वरूप क्या होना चाहिए, खासकर तब जब मंच अंतरराष्ट्रीय और संवेदनशील हो। Post navigation सर्दी, जुकाम और बुखार के बीच 14 दिन में 20 से ज्यादा मौतें, दहशत में गांव दिल्ली से मेरठ 55 मिनट में, पीएम मोदी ने ‘नमो भारत रैपिड रेल’ का पूरा कॉरिडोर किया शुरू