कौशांबी ब्यूरो, मोहम्मद फैज महेवाघाट थाना पुलिस की सक्रियता और सटीक जांच के चलते गुमशुदा महिला से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को पलट कर रख दिया। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि महिला अपने प्रेमी के साथ हरियाणा में सुरक्षित मिली, जबकि उसके परिजनों द्वारा पति और ससुराल पक्ष पर लगाए गए दहेज हत्या और अपहरण के आरोप पूरी तरह झूठे निकले। इस खुलासे के बाद पुलिस ने निर्दोष पति को जेल से रिहा कराया और झूठा आरोप लगाने वाले पक्ष के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पूरा मामला 22 जनवरी 2026 से शुरू होता है, जब अलवारा गांव निवासी राजू तिवारी ने अपनी पत्नी के अचानक घर से लापता होने की सूचना महेवाघाट थाना पुलिस को दी थी। पुलिस ने तुरंत गुमशुदगी दर्ज कर महिला की तलाश शुरू कर दी। करीब एक महीने बाद 20 फरवरी को महिला के पिता शारदा प्रसाद मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए दहेज प्रताड़ना, अपहरण और हत्या की आशंका जताई और पति तथा ससुराल पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। गंभीर आरोपों के चलते 27 फरवरी को राजू तिवारी ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। इसी बीच पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्य और सर्विलांस की मदद से जांच को आगे बढ़ाया। जांच के दौरान महिला के मौसेरे भाई संकल्प मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की। लगातार प्रयासों के बाद 22 मार्च को पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली, जिसके आधार पर हरियाणा के मानेसर स्थित इंडस्ट्रियल सेक्टर-7 में छापेमारी की गई। यहां से महिला को संकल्प मिश्रा के किराए के कमरे से सकुशल बरामद कर लिया गया। पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी से अपने मौसेरे भाई के साथ प्रेम संबंध के कारण वहां गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि महिला पहले भी वर्ष 2024 में इसी युवक के साथ दिल्ली जा चुकी थी, तब भी मामला सामने आने के बाद समझौता कराया गया था। इसके बावजूद परिजनों ने सच्चाई जानते हुए भी पति और उसके परिवार पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया और पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की। महिला के बयान के बाद पुलिस ने तुरंत अदालत को रिपोर्ट भेजी और जेल में बंद राजू तिवारी को रिहा कराया गया। वहीं, राजू तिवारी के पिता की तहरीर पर महिला के पिता, भाई और मौसेरे भाई समेत चार लोगों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने और साजिश रचने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मंझनपुर पुलिस कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में पुलिस अधीक्षक ने बताया कि निष्पक्ष और तकनीकी जांच के कारण इस मामले का सफल खुलासा हो सका, जिससे एक निर्दोष व्यक्ति को न्याय मिला। यह मामला न केवल पुलिस की कार्यशैली को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सही जांच और साक्ष्यों के आधार पर सच्चाई सामने आ सकती है और न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। Post navigation मिर्ज़ापुर पहुचे UP के DGP राजीव कृष्ण, फरसा बाबा केस पर क्या बोले? Kaushambi News: डीएम अमित पाल का अल्टीमेटम, अधिकारियों का वेतन तक रोका गया