भारत में फिलहाल एक बड़ा विवाद चल रहा है, जिसका केंद्र है पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब “Four Stars of Destiny”। किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन इसके कारण संसद, मीडिया और सोशल मीडिया में हंगामा मचा हुआ है। इस किताब में गलवान घाटी विवाद, सेना और सरकार के बीच की बातचीत और निर्णयों की अंदरूनी बातें शामिल हैं। भारत में फिलहाल एक सियासी और सुरक्षा विवाद चल रहा है। इस विवाद का केंद्र है पूर्व सेना प्रमुख (Chief of Army Staff) जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब “Four Stars of Destiny”, किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई, लेकिन इसके कारण संसद, मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा तेज हो गई है। आइए जानते हैं कि आखिर किताब में क्या है और क्यों इसे लेकर सरकार और जनता में हंगामा मचा हुआ है। किताब में क्या लिखा है? गलवान घाटी विवादनरवणे ने अपनी किताब में बताया कि 2020 में गलवान घाटी में चीनी टैंक भारत की सीमा में घुस आए थे। सेना ने तुरंत कार्रवाई की सलाह दी, लेकिन उस समय सरकार की नीति और सर्वोच्च आदेशों के कारण तुरंत गोली चलाने की अनुमति नहीं थी। पीएम मोदी का संदेश किताब के अनुसार, पीएम मोदी ने नरवणे को संदेश दिया: “जो उचित समझो, वो करो” इस संदेश ने नरवणे और सेना को निर्णय लेने में अकेला महसूस कराया। सेना और सरकार के बीच मतभेदकिताब में यह भी लिखा है कि सुरक्षा मामलों में सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच संवाद की कमी थी। कई महत्वपूर्ण निर्णयों में सेना को अकेला छोड़ दिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा की बातेंकिताब में सेना की तैयारी, रणनीति और सीमा सुरक्षा की अंदरूनी चुनौतियों को उजागर किया गया है, जिन्हें आम जनता पहले नहीं जानती थी। विवाद क्यों हो रहा है? किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई, लेकिन संसद में इसका जिक्र हो गया। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस किताब को लेकर सवाल उठाए कि क्या किताब में लिखी बातें सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएंगी। सरकार को डर है कि किताब पब्लिश होने पर जनता और मीडिया में बहस शुरू हो सकती है। किताब में सेना और सरकार के बीच की संवेदनशील बातें लिखी हैं, इसलिए इसे राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। सरकार की प्रतिक्रिया केंद्र सरकार ने अभी किताब पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। सरकार का डर यह है कि किताब में लिखी बातें से उनके फैसलों पर सवाल उठा सकते हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना की रणनीति पर बहस का कारण बन सकती है। जनता और विपक्षी दलों के बीच बहस तेज हो सकती है। Post navigation भारत टैक्सी लॉन्च: ओला-उबर को टक्कर देने आई देश की पहली को-ऑपरेटिव ऐप!