इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी होने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही से लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। अदालत ने साफ शब्दों में पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि अदालत को हल्के में न लिया जाए और जनता का विश्वास बनाए रखा जाए।

यह मामला साल 2019 की एक आपराधिक अपील से जुड़ा है। इसमें हत्या के दोषी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों और आरोपी के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट और आरोपी के हलफनामे में बड़ा विरोधाभास दिख रहा है। पुलिस का कहना था कि आरोपी का पता नहीं चल सका, जबकि आरोपी ने दावा किया कि पुलिस उसके घर पहुंचकर वारंट की जानकारी दे चुकी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस अधिकारियों को तलब किया था। इसके तहत संबंधित जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया। सुनवाई में कुछ अधिकारी खुद अदालत पहुंचे, जबकि एक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ा। अदालत ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारी खुद उपस्थित रहें और प्रतिनिधि भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित कांस्टेबल और उप-निरीक्षक समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आगे से अदालत द्वारा जारी गैर जमानती वारंट का समय पर पालन कराया जाएगा।

अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 23 मार्च तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं

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