Photo: Google

रिपोर्ट, मोहम्मद फैज

पश्चिम बंगाल में इस बार होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि राज्य में इस बार मतदान केवल दो चरणों में कराया जाएगा। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले चुनावों में पश्चिम बंगाल में कई चरणों में मतदान कराया गया था। इस बार चरणों की संख्या कम करने के पीछे की वजह को लेकर भी चुनाव आयोग ने विस्तार से जानकारी दी है।

इस संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने बताया कि मतदान के चरणों की संख्या कम करने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि इस पर काफी समय तक विचार-विमर्श और विस्तृत चर्चा की गई। चुनाव आयोग ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स, प्रशासनिक तैयारियों और पिछले चुनावों के अनुभवों का गहन अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया है।

दो चरणों में होगा मतदान

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। वहीं दूसरे चरण में बाकी 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस तरह कुल 294 सीटों वाली West Bengal Legislative Assembly के लिए दो चरणों में मतदान संपन्न कराया जाएगा। चुनाव आयोग का मानना है कि बेहतर योजना और पर्याप्त सुरक्षा बलों की उपलब्धता के कारण इस बार कम चरणों में भी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से कराए जा सकते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि तकनीक और चुनाव प्रबंधन के नए तरीकों के चलते अब मतदान प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और तेज बनाया जा सकता है।

मतदाताओं की बड़ी संख्या

चुनाव आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में इस बार लगभग 6.44 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें बड़ी संख्या में युवा मतदाता भी शामिल हैं, जो पहली बार मतदान करने जा रहे हैं। राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मतदान केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है ताकि मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा, सुचारु व्यवस्था और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।

बड़े चुनावी कार्यक्रम का हिस्सा

पश्चिम बंगाल के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों में भी चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार कुल चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराए जाएंगे। इन सभी क्षेत्रों को मिलाकर करीब 17.4 करोड़ मतदाता इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। ऐसे बड़े चुनावी कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करना चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती होता है। इसलिए चरणों की संख्या तय करते समय सुरक्षा बलों की उपलब्धता, प्रशासनिक संसाधन और चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखा जाता है।

कम चरणों का क्या मतलब?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कम चरणों में चुनाव होने से पूरी प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती है। इससे चुनावी माहौल लंबे समय तक तनावपूर्ण नहीं रहता और प्रशासनिक मशीनरी पर भी दबाव कम पड़ता है। हालांकि यह भी जरूरी होता है कि सुरक्षा और निष्पक्षता से कोई समझौता न हो। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कम चरणों का फैसला चुनाव को आसान बनाने के लिए नहीं बल्कि बेहतर प्रबंधन के लिए लिया गया है। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराया जाएगा।

आगे की तैयारियां

चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है और जल्द ही उम्मीदवारों की घोषणा भी की जा सकती है।

फिलहाल चुनाव आयोग का फोकस इस बात पर है कि मतदान प्रक्रिया पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। आयोग का कहना है कि सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी ताकि मतदाता बिना किसी डर या परेशानी के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *