रिपोर्ट, नितिन अग्रहरि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजराइल के बीच जारी टकराव का असर अब दुनिया के कई देशों पर दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार में अस्थिरता के कारण एलपीजी यानी घरेलू गैस की सप्लाई को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं तो कई जगहों पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या एक बार फिर लोगों को पुराने दौर की तरह कोयले की अंगीठी या मिट्टी के तेल के चूल्हे का सहारा लेना पड़ेगा? क्या वह समय लौट सकता है जब मोहल्लों में ‘सांझा चूल्हा’ जलता था और कई परिवार एक साथ खाना बनाते थे? दरअसल, एलपीजी ने पिछले दो-तीन दशकों में भारतीय रसोई की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। पहले जहां ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में लकड़ी, कोयला या मिट्टी के तेल के चूल्हे आम थे, वहीं अब ज्यादातर घरों में गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। इससे न सिर्फ खाना बनाना आसान हुआ बल्कि धुएं और प्रदूषण की समस्या भी काफी हद तक कम हुई। लेकिन यदि एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होती है तो लोगों को वैकल्पिक ईंधन की ओर रुख करना पड़ सकता है। सबसे पहला विकल्प कोयले की अंगीठी हो सकता है। पहले के समय में कई घरों में कोयले की अंगीठी पर ही खाना बनाया जाता था। यह तरीका आज भी कुछ जगहों पर इस्तेमाल होता है, खासकर छोटे ढाबों या सड़क किनारे चाय की दुकानों पर। लेकिन घरों में इसका उपयोग करना आसान नहीं है। कोयले की अंगीठी से काफी धुआं निकलता है, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। खासकर बंद कमरों या छोटे मकानों में यह खतरनाक भी साबित हो सकता है। दूसरा विकल्प मिट्टी के तेल यानी केरोसिन का चूल्हा है। यह भी कभी आम घरेलू ईंधन हुआ करता था। लेकिन आज के समय में केरोसिन की उपलब्धता पहले जैसी नहीं रही। सरकारी स्तर पर भी केरोसिन के इस्तेमाल को धीरे-धीरे कम किया गया है। इसके अलावा केरोसिन चूल्हे में आग लगने या दुर्घटना की आशंका भी रहती है, इसलिए कई लोग इसे सुरक्षित विकल्प नहीं मानते। गांवों में लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, लेकिन शहरों में यह लगभग असंभव है। बड़े शहरों में न तो इतनी जगह होती है और न ही लकड़ी आसानी से उपलब्ध होती है। इसके अलावा लकड़ी जलाने से धुआं और प्रदूषण भी काफी बढ़ता है। गर्मी के मौसम में इन चूल्हों के सामने खड़े होकर खाना बनाना किसी प्रताड़ना से कम नहीं होता। यही वजह है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि एलपीजी का कोई भी विकल्प पूरी तरह सुविधाजनक नहीं है। गैस सिलेंडर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साफ, तेज और अपेक्षाकृत सुरक्षित ईंधन है। इसलिए सरकारें भी लगातार एलपीजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश करती रही हैं। हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं तो लोगों को कुछ समय के लिए पुराने विकल्पों की ओर लौटना पड़ सकता है। लेकिन यह भी सच है कि आज के शहरी जीवन में ‘सांझा चूल्हा’ या अंगीठी वाला दौर पूरी तरह लौट पाना मुश्किल नजर आता है। फिलहाल लोगों की उम्मीद यही है कि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति जल्द सामान्य हो और रसोई की सबसे जरूरी जरूरत घरेलू गैस बिना किसी बाधा के मिलती रहे। Post navigation एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी: बुकिंग के बाद भी लोगों को नहीं मिल रहा सिलेंडर, ऐसे करें शिकायत LPG Cylinder Scam: सिलेंडर दिलाने का झांसा, लिंक पर क्लिक करते ही उड़ रहे पैसे