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मिर्ज़ापुर ब्यूरो, विद्या प्रकाश भारती 

मिर्ज़ापुर में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna के दौरे के दौरान कानून-व्यवस्था और गौ तस्करी से जुड़े मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। अष्टभुजा डाक बंगले में आयोजित इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हालिया घटनाओं पर चर्चा करते हुए डीजीपी ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में डीजीपी ने मथुरा की हालिया घटना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस बिंदु पर माहौल खराब होने की बात सामने आई है, उस पर गहन जांच की जा रही है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गौ तस्करी के मुद्दे को लेकर डीजीपी ने कहा कि यह मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है और इस पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में संगठित रूप से इस अपराध में शामिल गिरोहों के खिलाफ अभियान चलाया गया है। हाल के दिनों में ऐसे नेटवर्क के फाइनेंशियल स्रोतों को भी तोड़ा गया है, जिससे अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल निचले स्तर के लोगों पर ही नहीं, बल्कि इस तरह के मामलों में ऊपर तक जुड़े लोगों की पहचान कर पूरे प्रदेश में कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा की मौत के मामले पर भी डीजीपी ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि फरसा बाबा अपने कुछ साथियों के साथ एक सूचना के आधार पर एक गाड़ी को रोकने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली और टीम मौके पर पहुंची। लेकिन पीछे से आ रही एक अन्य गाड़ी की टक्कर से यह हादसा हुआ, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई।

डीजीपी ने इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वयं जाकर कार्रवाई करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने जनता से अपील की कि यदि कहीं भी इस तरह की कोई सूचना मिलती है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें, ताकि समय पर उचित कार्रवाई की जा सके। इस मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 13 अराजक तत्वों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। डीजीपी ने कहा कि गौ तस्करी और उससे जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया है। डीजीपी के अनुसार, शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि जिन गाड़ियों को संदिग्ध माना जा रहा था, उनमें किसी प्रकार के पशु नहीं थे। उनमें किराने का सामान और वायर लदा हुआ था। कुल मिलाकर, डीजीपी का यह दौरा प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की सख्त नीति और पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है। उन्होंने साफ कर दिया कि चाहे मामला गौ तस्करी का हो या किसी अन्य अपराध का, कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई होगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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