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कौशांबी ब्यूरो, मोहम्मद फैज 

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित होने वाली ‘दिशा’ बैठक अचानक स्थगित कर दी गई, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह बैठक कलेक्ट्रेट में सांसद की अध्यक्षता में प्रस्तावित थी, लेकिन समीक्षा के दौरान उठे सवालों और अधिकारियों के संतोषजनक जवाब न दे पाने के कारण बैठक को बीच में ही स्थगित करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, सांसद पुष्पेन्द्र सरोज की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (Disha Committee) की बैठक आयोजित की जानी थी। इस बैठक का उद्देश्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति और पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना था। बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

बताया जा रहा है कि बैठक शुरू होते ही सांसद ने पिछली बैठक की कार्यवाही का बिंदुवार विवरण मांगा। उन्होंने अधिकारियों से विकास कार्यों की प्रगति, खर्च की गई धनराशि और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देने को कहा। हालांकि कई अधिकारियों द्वारा मांगी गई जानकारी तुरंत प्रस्तुत नहीं की जा सकी, जिससे सांसद ने नाराजगी जताई।

अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने को गंभीरता से लेते हुए सांसद ने बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके बाद उन्होंने जिला अधिकारी डॉ. अमित पाल को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर सभी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाए और उसके बाद पुनः बैठक आयोजित की जाए। बैठक के दौरान सांसद ने जिले में विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और कई विकास कार्यों में कमीशन सिस्टम की शिकायतें सामने आ रही हैं। सांसद का कहना था कि छोटे कार्यों में भी कथित रूप से हजारों रुपये और बड़े प्रोजेक्ट्स में लाखों रुपये तक की अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं।

इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य का नाम लिए बिना उन पर भी निशाना साधा। सांसद ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री का गृह जनपद होने के बावजूद भ्रष्टाचार की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।

‘दिशा’ बैठक के स्थगित होने से जिला प्रशासन में हलचल देखी गई है। अब सभी की नजरें आगामी एक सप्ताह में प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सभी विभागों से जानकारी जुटाकर पारदर्शी रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगली बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा किस तरह की जाती है और विवादों को कैसे सुलझाया जाता है।

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