हरदोई ब्यूरो, सौरभ तिवारी उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के माधौगंज कस्बे में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati का आगमन हुआ। वह अपनी “गो प्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा” के तहत यहां पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गौमाता को राष्ट्रमाता और राज्य माता का दर्जा देने की मांग उठाई और कहा कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 11 मार्च को लखनऊ में धर्मयुद्ध का ऐलान किया जाएगा। माधौगंज में आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा कि भारत ज्ञान और पुण्य की भूमि है, जहां मनुष्य अपने कर्मों से पुण्य और पाप दोनों कमा सकता है। उन्होंने हरदोई की ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि यह भूमि हिरण्यकश्यप से भी जुड़ी हुई मानी जाती है और यहां के लोग उसे हरिद्रोही कहकर पुकारते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में ब्राह्मण और गाय को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। लेकिन आज के समय में इन्हीं पर सबसे ज्यादा प्रहार हो रहे हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पिछली पशुधन गणना के अनुसार देश में 15 से 20 लाख गायों की संख्या कम हो गई है, जो गंभीर विषय है। शंकराचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि सत्तासीन दल ने गौहत्या से जुड़ी कंपनियों से इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा लिया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है और इस पर समाज को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू राज्य केवल नाम से नहीं बल्कि न्याय और धर्म के आधार पर बनता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कंस और रावण का भी हिंदू राज्य था, लेकिन वहां की प्रजा खुश नहीं थी। इसलिए केवल नाम से नहीं बल्कि व्यवस्था और न्याय से ही धर्म आधारित राज्य की पहचान होती है। शंकराचार्य ने कहा कि आज धर्म के नाम पर ढोंग बढ़ता जा रहा है। लोगों को असली धर्मावलंबियों और ढोंगियों के बीच फर्क समझना होगा। उन्होंने समाज से अपील की कि वे धर्म की वास्तविक भावना को समझें और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं दिया गया तो 11 मार्च को लखनऊ में धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह युद्ध किसी प्रकार के हथियारों का नहीं होगा, बल्कि विचारों का होगा। इसमें पहले उनकी ओर से अपनी बात रखी जाएगी और फिर सरकार तथा समाज से जवाब की प्रतीक्षा की जाएगी। अंत में शंकराचार्य ने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक नहीं हैं। लेकिन जो भी राजनीतिक दल गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की पहल करेगा, उसका समर्थन किया जाएगा। हरदोई के माधौगंज में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने शंकराचार्य के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में भी नई चर्चा शुरू हो गई है। Post navigation मिर्जापुर मंडलीय चिकित्सालय में शव गृह विवाद: चूहों ने खाया मृतक का शव, परिजनों ने किया हंगामा सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में लापरवाही, कोर्ट ने डीएम को ठहराया जिम्मेदार