मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े युद्ध की आहट से कांप रहा है। ईरान और इज़रायल के बीच शुरू हुआ टकराव अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा। दूसरे ही दिन हालात इतने गंभीर हो गए कि अमेरिका ने भी सीधे सैन्य मोर्चे पर कदम रख दिया। मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और सैन्य चेतावनियों के बीच पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद हालात और ज्यादा भड़क गए हैं। बदले की कसम खाते हुए ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और तेल टैंकरों को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि अमेरिका और इज़रायल ने अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। 1. जंग का दायरा तेजी से बढ़ा जंग के दूसरे दिन हालात और ज्यादा खतरनाक हो गए। रविवार को कई जगहों पर मिसाइल हमलों की खबरें सामने आईं। इज़रायल के शहर बेत शेमेश में कई रॉकेट गिरने की सूचना मिली, जिससे भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में भी तनाव फैल गया। संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में भी मिसाइल अलर्ट जारी कर दिया गया। कई जगहों पर लोगों को बंकरों में शरण लेने की सलाह दी गई। सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग हमलों में सैकड़ों लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में घायल होने की खबर है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि कई जगहों पर अभी भी जारी है। 2. अमेरिका ने दिखाया सैन्य दम जैसे-जैसे हालात बिगड़ते गए, अमेरिका ने भी अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक बॉम्बर विमानों को क्षेत्र में भेजा और अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा बढ़ा दी। अमेरिका का कहना है कि वह अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यदि ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों या जहाजों को निशाना बनाया तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। इस कदम को कई विशेषज्ञ युद्ध के बड़े विस्तार की चेतावनी मान रहे हैं। 3. ईरान का बदले का ऐलान दूसरी तरफ ईरान ने भी सख्त रुख अपना लिया है। ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनके नेताओं पर हमला “सीधी जंग” की शुरुआत है और इसका जवाब जरूर दिया जाएगा। ईरान ने दावा किया है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कुछ तेल टैंकरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि इन दावों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका और इज़रायल ने हमले जारी रखे, तो पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झोंक दिया जाएगा। 4. खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट के कई देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन गई है। खाड़ी के देशों को डर है कि अगर यह जंग लंबी चली तो तेल आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। तेल टैंकरों और समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदलने शुरू कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्री रास्ते प्रभावित होते हैं तो दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। 5. दुनिया की निगाहें मिडिल ईस्ट पर पूरी दुनिया की नजर अब मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई है। कई बड़े देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक संगठन भी इस संकट को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हैं। लेकिन जमीन पर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। Post navigation खामेनेई की मौत के बाद ईरान का बड़ा हमला, मिडिल ईस्ट में बड़ा सैन्य ऑपरेशन का दावा US-Israel-Iran War: इजरायल के हमले में घायल खामेनेई की पत्नी की भी मौत