Credit Google

तेल अवीव/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi के संभावित इजराइल दौरे को लेकर कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी 27–28 फरवरी को इजराइल की यात्रा पर जा सकते हैं, हालांकि अभी तक इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सार्वजनिक मंच से पीएम मोदी के स्वागत को लेकर उत्साह जाहिर किया है। नेतन्याहू ने ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ प्रेसिडेंट्स ऑफ मेजर अमेरिकन ज्यूइश ऑर्गनाइजेशंस’ को संबोधित करते हुए संकेत दिया कि भारत के प्रधानमंत्री का दौरा बेहद अहम होने वाला है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अगले हफ्ते यहां कौन आ रहा है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।” उन्होंने आगे कहा कि वे उनका शानदार स्वागत करेंगे। नेतन्याहू की यह टिप्पणी दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की ओर इशारा करती है।

भारत और इजराइल के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच चुके हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरा तालमेल है। प्रधानमंत्री मोदी की 2017 की ऐतिहासिक इजराइल यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा आई थी। उस दौरे को दोनों देशों के संबंधों में मील का पत्थर माना जाता है। संभावित यात्रा ऐसे समय में चर्चा में है जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में भू-राजनीतिक परिस्थितियां जटिल बनी हुई हैं। ऐसे में भारत और इजराइल के बीच उच्चस्तरीय संवाद को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह दौरा होता है तो इसमें रक्षा सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक, स्टार्टअप साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हो सकती है।

भारत लंबे समय से इजराइल का एक प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है। मिसाइल प्रणाली, ड्रोन तकनीक और निगरानी उपकरणों जैसे क्षेत्रों में सहयोग उल्लेखनीय रहा है। इसके अलावा कृषि तकनीक और जल संरक्षण मॉडल में भी इजराइल की विशेषज्ञता का लाभ भारत उठा रहा है। ऐसे में यह दौरा आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा प्रतीकात्मक और व्यावहारिक—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होगी। एक ओर यह दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाएगी, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक मंच पर भारत-इजराइल साझेदारी के संदेश को भी मजबूत करेगी। नेतन्याहू और मोदी के बीच पहले भी कई बार मुलाकातें हो चुकी हैं और दोनों नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मान व्यक्त करते रहे हैं।

हालांकि अभी तक भारत सरकार या इजराइल सरकार की ओर से आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन नेतन्याहू के बयान ने संभावनाओं को बल दे दिया है। यदि दौरे की पुष्टि होती है, तो यह वर्ष 2026 में भारत की पश्चिम एशिया नीति के लिहाज से एक अहम कड़ी साबित हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। लेकिन नेतन्याहू के उत्साहपूर्ण बयान से इतना स्पष्ट है कि इजराइल इस संभावित यात्रा को बेहद महत्व दे रहा है। दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों के बीच यह दौरा नई रणनीतिक दिशा तय कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *