Credit: Google

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जाति और नेतृत्व को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख बनने के लिए किसी व्यक्ति का ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय का व्यक्ति संघ का प्रमुख बन सकता है, बशर्ते उसमें सेवा, समर्पण और नेतृत्व की क्षमता हो। उनके इस बयान को समाज में समानता और समरसता का संदेश देने वाला माना जा रहा है।

मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच शुरू से ही व्यक्ति की जाति या जन्म पर नहीं, बल्कि उसके संस्कार, विचार और काम पर आधारित रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संघ में पद किसी जाति विशेष के लिए आरक्षित नहीं होते। जो व्यक्ति राष्ट्र सेवा के भाव से काम करता है, समाज को जोड़ने की क्षमता रखता है और संगठन के मूल विचारों को समझता है, वही आगे बढ़ता है।

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की परंपरा में “ब्राह्मण” शब्द का अर्थ जन्म से नहीं, बल्कि गुण और कर्म से जुड़ा हुआ है। उन्होंने समझाया कि जो व्यक्ति ज्ञान अर्जित करता है, समाज को दिशा देता है और दूसरों के लिए आदर्श बनता है, वही वास्तविक अर्थों में ब्राह्मण कहलाता है। केवल किसी विशेष परिवार या जाति में जन्म लेना किसी को श्रेष्ठ नहीं बनाता।

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि आज के समय में जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशें हो रही हैं, जो देश और समाज के लिए नुकसानदायक हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जाति से ऊपर उठकर सोचें और व्यक्ति को उसके काम और सोच के आधार पर आंकें। संघ प्रमुख के मुताबिक, समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब हर व्यक्ति को समान अवसर मिले और योग्यता को महत्व दिया जाए।

उन्होंने संघ के कामकाज का उदाहरण देते हुए कहा कि संगठन में अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले लोग जिम्मेदार पदों पर हैं। RSS में कार्यकर्ता गांव, शहर, गरीब, मध्यम वर्ग और अलग-अलग जातियों से आते हैं। यहां किसी को उसकी जाति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके योगदान और अनुशासन के आधार पर जिम्मेदारी दी जाती है।

मोहन भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ इसलिए आगे बढ़ता है क्योंकि वह किसी खास जाति में पैदा हुआ है, तो यह समाज के लिए सही नहीं है। असली नेतृत्व वही है जो सबको साथ लेकर चले और समाज के हर वर्ग के हित में काम करे।

उनके इस बयान को मौजूदा समय में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश में जाति को लेकर बहस और राजनीति तेज रहती है। कई बार नेतृत्व और पदों को लेकर जाति के आधार पर सवाल उठते हैं। ऐसे में संघ प्रमुख का यह कहना कि “किसी भी जाति का व्यक्ति संघ प्रमुख बन सकता है”, एक मजबूत संदेश देता है।

अंत में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है। अलग-अलग जाति, भाषा और संस्कृति के लोग मिलकर ही देश को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हम व्यक्ति को उसकी योग्यता से नहीं आंकेंगे, तब तक सच्ची समानता संभव नहीं है। संघ इसी सोच के साथ काम करता रहेगा और समाज में समरसता और एकता को आगे बढ़ाता रहेगा।

यह बयान न केवल संघ की विचारधारा को स्पष्ट करता है, बल्कि समाज को यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि असली योग्यता जन्म से नहीं, कर्म और विचार से तय होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *