देश की न्याय व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली एक घटना ने पूरे कानूनी जगत को झकझोर कर रख दिया है। एक अदालत के भीतर, वह भी जज की मौजूदगी में, एक वकील के साथ मारपीट की घटना सामने आई। इस मामले ने न सिर्फ अदालत की गरिमा पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी दिखा दिया कि अगर न्यायालय जैसे पवित्र स्थान सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम नागरिक की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस गंभीर घटना पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा— “यह कोई गुंडा राज नहीं है। कोर्ट रूम में कानून का राज चलेगा, किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” क्या है पूरा मामला? घटना उस समय घटी जब अदालत में एक केस की सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि कुछ लोगों ने खुलेआम एक वकील पर हमला कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि यह सब जज के सामने हुआ और कुछ देर के लिए अदालत का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने न सिर्फ वकील को धक्का-मुक्की की, बल्कि हाथापाई तक कर डाली। कोर्ट रूम में मौजूद अन्य वकील और कर्मचारी बीच-बचाव के लिए आगे आए, तब जाकर स्थिति काबू में आ सकी। न्यायपालिका की गरिमा पर हमला कोर्ट रूम को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, जहां कानून और संविधान सर्वोपरि होते हैं। ऐसे में अदालत के भीतर हिंसा की घटना को न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जा रहा है। बार काउंसिल और वकीलों के संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि अगर कोर्ट रूम में वकील ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो न्याय प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी मामले पर संज्ञान लेते हुए CJI सूर्यकांत ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि अदालतों को डर या दबाव में चलने नहीं दिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट रूम में अनुशासन सर्वोपरि है किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी CJI ने यह भी कहा कि अदालतें किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या व्यक्तिगत दबाव के आगे नहीं झुकेंगी। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद अदालत परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कई वकीलों ने मांग की है कि कोर्ट रूम में प्रवेश पर सख्त निगरानी हो सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए संवेदनशील मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए उनका कहना है कि बढ़ते तनावपूर्ण मामलों के बीच कोर्ट परिसरों को सुरक्षित बनाना समय की जरूरत है। बार एसोसिएशन का आक्रोश घटना के विरोध में कई जगहों पर वकीलों ने कामकाज बंद कर प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। Post navigation मोहन भागवत का बड़ा बयान, ‘ब्राह्मण होना योग्यता नहीं, किसी भी जाति का व्यक्ति बन सकता संघ प्रमुख’ यूपी में बीजेपी के गले की फांस बनती कास्ट पॉलिटिक्स? सत्ता की हैट्रिक पर मंडराता खतरा!