कौशांबी ब्यूरो, मोहम्मद फैज कौशांबी में आंखों की गंभीर बीमारी काला मोतिया (ग्लूकोमा) के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से सोमवार को विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। यह कार्यक्रम स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशाम्बी के तत्वावधान में आयोजित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी देना और समय पर नेत्र जांच कराने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह करीब 11 बजे चिकित्सालय परिसर में जागरूकता रैली के साथ हुई। इस रैली में मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र-छात्राएं और मेडिकल स्टाफ शामिल हुए। प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर लोगों को ग्लूकोमा के बारे में जानकारी दी। रैली के दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों को बताया गया कि काला मोतिया को “दृष्टि का मूक चोर” कहा जाता है, क्योंकि यह बिना दर्द के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को प्रभावित करता है। रैली के माध्यम से लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच कराने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद कॉलेज के लेक्चर थिएटर-2 में एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. हरिओम कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि काला मोतिया एक गंभीर नेत्र रोग है, जिसमें धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होती चली जाती है और कई बार मरीज को इसका पता भी नहीं चल पाता। उन्होंने बताया कि खासकर 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या का समय रहते पता चल सके। यदि इस बीमारी का समय पर पता चल जाए तो इलाज के माध्यम से आंखों की बची हुई रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से ग्लूकोमा के वैज्ञानिक पहलुओं और इससे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. मृदुला रंजन ने बताया कि काला मोतिया के शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। कई बार मरीज को तब तक पता नहीं चलता जब तक आंखों की रोशनी काफी कम नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मधुमेह, उच्च रक्तचाप या जिनके परिवार में पहले से ग्लूकोमा का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से आंखों के दबाव की जांच करानी चाहिए, क्योंकि यही जांच इस बीमारी की शुरुआती पहचान में मदद करती है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि काला मोतिया से होने वाले नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन समय पर पहचान और उचित उपचार से आंखों की बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए अंधापन रोकने के लिए शुरुआती जांच और समय पर इलाज सबसे प्रभावी उपाय है। इस जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और छात्रों ने लोगों को यह संदेश दिया कि आंखों की नियमित जांच कराकर इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है और समय रहते इलाज से दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है। Post navigation बलिया में युवक पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला, बचाने आए भाई को भी पीटा; पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा Kaushambi News: भाकियू अम्बावता की मासिक बैठक में उठीं किसानों की समस्याएं, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन