Image Source Google

अमेठी ब्यूरो, नितेश तिवारी

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कमरौली थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में दर्ज नाबालिग अपहरण एवं दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। यह फैसला पीड़िता और उसके परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शुक्रवार को सुनाए गए निर्णय में अदालत ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई।

यह निर्णय एएसजे-12 की अदालत, सुलतानपुर द्वारा सुनाया गया। मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध पाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के साथ इस प्रकार के अपराध समाज में अस्वीकार्य हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में सशक्त संदेश जाए।

पुलिस अधीक्षक सरवणन टी. ने जानकारी देते हुए बताया कि कमरौली थाना क्षेत्र में फरवरी 2022 में वादी की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि साहिल पुत्र मो. अमीन, निवासी गुमानीगंज मजरा रसूलपुर, ने वादी की नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366 और 376 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज किया था।

मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य एकत्र किए, पीड़िता का बयान दर्ज किया और मेडिकल परीक्षण सहित अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। सशक्त विवेचना और अभियोजन के परिणामस्वरूप अदालत में आरोप सिद्ध हुए। 27 फरवरी 2026 को सुनाए गए फैसले में न्यायालय ने आरोपी को धारा 366 के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास और 5,000 रुपये का अर्थदंड तथा धारा 376 के तहत दस वर्ष का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अर्थदंड अदा नहीं किया गया तो आरोपी को अतिरिक्त दो माह का कारावास भुगतना होगा।

इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर सख्त कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने भी इसे अपनी प्रभावी जांच और अभियोजन की सफलता बताया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत करना बेहद जरूरी होता है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।

यह निर्णय समाज को यह संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी अपराधी बच नहीं सकता, खासकर तब जब मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हो। न्यायालय का यह सख्त फैसला भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में सहायक साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *