कौशांबी ब्यूरो, मोहम्मद फैज

कौशांबी जिले में यमुना नदी की जल धारा को मोड़कर बालू का अवैध खनन जारी होने का मामला सामने आया है। महेवा घाट क्षेत्र से वायरल हुए वीडियो में दिख रहा है कि यमुना नदी में अस्थाई पुल बनाकर मशीनों के माध्यम से बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट निर्देशों के खुले उल्लंघन के रूप में सामने आई है। स्थानीय लोग और पर्यावरण विशेषज्ञ इस खनन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। यमुना नदी का प्राकृतिक प्रवाह रोककर बालू खनन करना न केवल नदी की पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा है, बल्कि यह नदी के आसपास के समुदायों और कृषि पर भी गंभीर असर डालता है। नदी की जल धारा में बदलाव से बाढ़ और कटाव जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि नदी की धारा को मोड़कर मशीनों के जरिए बालू निकाला जा रहा है। इस अवैध गतिविधि से कौशांबी प्रशासन की नाकामी और चुप्पी भी उजागर हो रही है। सवाल उठता है कि इतनी सार्वजनिक और खुली अवैध गतिविधि के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। महेवा घाट थाना क्षेत्र में यह खनन लंबे समय से जारी है और स्थानीय लोग इसे लेकर लगातार प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं। बावजूद इसके, अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का अवैध खनन यमुना नदी की जल गुणवत्ता और स्थानीय जल संसाधनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

NGT ने पहले ही बालू खनन और नदी संरक्षण के लिए कड़े नियम और निर्देश जारी किए हैं, लेकिन कौशांबी में इनका पालन नहीं हो रहा। अवैध खनन को रोकने में प्रशासन की उदासीनता चिंता बढ़ा रही है। इस मामले में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की गंभीर अनदेखी दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि प्रशासन तुरंत इस अवैध खनन पर रोक लगाए और नदी की प्राकृतिक धारा को बहाल करे। साथ ही, बालू खनन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि यमुना नदी और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके। कौशांबी प्रशासन पर सवाल है कि दिनदहाड़े चल रहे अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई कब और कैसे होगी। यमुना नदी में हो रहे इस अवैध खनन पर निगरानी बढ़ाने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने की सख्त जरूरत है।

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