कौशाम्बी ब्यूरो, मोहम्मद फैज कौशाम्बी

मंझनपुर। सराय अकिल थाना क्षेत्र के उमरवलघाट में कथित अवैध बालू खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि रात के अंधेरे में नावों के जरिए बड़े पैमाने पर बालू निकासी की जा रही है, जबकि गांव वालों को किसी वैध पट्टे या पर्यावरणीय स्वीकृति की जानकारी नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या बिना अनुमति खनन हो रहा है? और यदि हो रहा है, तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?

ग्रामीणों के मुताबिक, खनन का काम रात में तेज हो जाता है और सुबह तक बालू से लदे ओवरलोड ट्रक गांव की सड़कों से गुजरते नजर आते हैं। क्या प्रशासन को इसकी भनक नहीं है? यदि है, तो रोकथाम के ठोस कदम अब तक क्यों नहीं उठाए गए?

खेत रौंदते ट्रक, नुकसान किसका?

ग्राम पिपरहटा निवासी श्यामबाबू दुबे, जो Bharatiya Kisan Union (Ambawata) से जुड़े हैं, ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए अवैध खनन पर तत्काल रोक की मांग की है। उनका कहना है कि ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही से गांव की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। कई जगह खेतों की मेड़ टूट गई है और खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? जिन खेतों में महीनों की मेहनत लगी थी, उनके रौंदे जाने की जिम्मेदारी किसकी तय होगी? ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग मौन साधे हुए हैं।

पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी?

खनन और परिवहन के दौरान धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा। क्या पर्यावरणीय नियमों का पालन हो रहा है? ओवरलोड वाहनों की तेज रफ्तार से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। गांव के बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।

यदि खनन वैध है, तो संबंधित पट्टा, अनुमति और पर्यावरणीय स्वीकृति सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? और यदि अवैध है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?

प्रशासन की अगली चाल?

श्यामबाबू दुबे ने मंझनपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर अतिरिक्त एसडीएम आकाश सिंह को ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या उमरवलघाट में चल रहे कथित अवैध खनन पर रोक लगेगी? क्या किसानों को न्याय मिलेगा? या फिर यह मामला भी शिकायतों और आश्वासनों के बीच दबकर रह जाएगा?

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