ब्यूरो प्रयागराज, संजय खान

Prayagraj और Bhopal से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धार्मिक घोषणा ने महाशिवरात्रि के अवसर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। किन्नर अखाड़ा ने ऐलान किया है कि इस पावन पर्व पर किन्नर समुदाय से नए शंकराचार्य की विधिवत घोषणा और पट्टाभिषेक किया जाएगा। यह कार्यक्रम वैदिक परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होगा।

किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजयदास ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों की परंपरा के अतिरिक्त, किन्नर अखाड़ा “पुष्कर पीठ” के नाम से एक अलग शंकराचार्य पीठ की स्थापना कर रहा है। इस पीठ से किन्नर समुदाय के प्रतिनिधि को शंकराचार्य घोषित किया जाएगा। उनका कहना है कि यह निर्णय सनातन धर्म में किन्नर समाज की आध्यात्मिक भूमिका को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

महाशिवरात्रि के दिन भोपाल के लालघाटी क्षेत्र के पास सुबह 10 बजे से पट्टाभिषेक कार्यक्रम आरंभ होगा। समारोह में देशभर से साधु-संतों और किन्नर समुदाय के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और पारंपरिक विधानों के साथ नए शंकराचार्य का अभिषेक किया जाएगा।

किन्नर अखाड़ा ने यह भी घोषणा की है कि इस अवसर पर लगभग 250 किन्नरों की सनातन धर्म में औपचारिक वापसी कराई जाएगी। बताया गया है कि ये वे लोग हैं जो पहले अन्य धर्मों में चले गए थे और अब पुनः सनातन परंपरा से जुड़ना चाहते हैं। अखाड़े के अनुसार, यह कदम सामाजिक और धार्मिक पुनर्संवाद की दिशा में उठाया जा रहा है।

नए घोषित होने वाले शंकराचार्य देशभर में किन्नर समुदाय के बीच धार्मिक जागरूकता और सनातन परंपराओं के प्रचार-प्रसार की मुहिम चलाएंगे। किन्नर अखाड़ा का दावा है कि यह पहल समाज में समावेशिता और धार्मिक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस घोषणा के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल, महाशिवरात्रि के दिन होने वाले इस पट्टाभिषेक समारोह पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, जिसे किन्नर अखाड़ा ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

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