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सोशल मीडिया पर बवाल मचाने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। बढ़ते विवाद और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों के बीच फिल्म का टीज़र और उससे जुड़ा सारा प्रमोशनल कंटेंट इंटरनेट से हटा दिया गया है। सरकार के इस कदम को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और संवेदनशील मुद्दों पर नियंत्रण के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है ‘घूसखोर पंडित’ विवाद?

फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ का टीज़र हाल ही में सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ किया गया था। टीज़र सामने आते ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। कई संगठनों और यूज़र्स ने आरोप लगाया कि फिल्म में ‘पंडित’ शब्द का इस्तेमाल एक खास समुदाय को नकारात्मक रूप में दिखाने के लिए किया गया है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

टीज़र में कथित तौर पर एक ऐसे किरदार को दिखाया गया था, जो धार्मिक पहचान के साथ भ्रष्टाचार और घूसखोरी में लिप्त नजर आता है। इसी बात को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह एक पूरे वर्ग को बदनाम करने की कोशिश है।

सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?

टीज़र रिलीज़ होते ही ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #GhooskhorPandit ट्रेंड करने लगा।
कुछ यूज़र्स ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने इसे धार्मिक अपमान करार दिया।

कई यूज़र्स ने सरकार से मांग की कि फिल्म के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। वहीं कुछ धार्मिक संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर कंटेंट नहीं हटाया गया तो देशभर में विरोध प्रदर्शन होंगे।

केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया?

विवाद बढ़ता देख सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने मामले का संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच के बाद सरकार ने संबंधित प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि फिल्म का टीज़र और उससे जुड़ा सारा प्रमोशनल कंटेंट तुरंत हटाया जाए।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक,

“ऐसा कोई भी कंटेंट जो समाज में तनाव पैदा करे या किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाए, उसे सार्वजनिक मंच पर रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

इसके बाद यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से टीज़र और पोस्ट्स हटाए गए।

फिल्म मेकर्स की तरफ से क्या कहा गया?

फिल्म के निर्माताओं की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया पर जारी एक संक्षिप्त बयान में उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी धर्म या समुदाय को ठेस पहुंचाने का नहीं था।

मेकर्स का दावा है कि फिल्म एक काल्पनिक कहानी है और इसका उद्देश्य समाज में फैले भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना था, न कि किसी धार्मिक वर्ग को निशाना बनाना।

सेंसर बोर्ड की भूमिका पर सवाल

इस विवाद के बाद सेंसर बोर्ड (CBFC) की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि अगर फिल्म में इतना संवेदनशील कंटेंट था, तो उसे प्रमोशन की अनुमति कैसे मिली?फिलहाल सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि फिल्म को रिलीज़ से पहले दोबारा जांच के दायरे में लाया जा सकता है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है जब किसी फिल्म या वेब कंटेंट को लेकर सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा हो। इससे पहले भी कई फिल्मों, वेब सीरीज़ और डॉक्यूमेंट्रीज़ पर धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक संवेदनशीलता के चलते कार्रवाई की जा चुकी है।

सरकार का रुख साफ है कि क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर सामाजिक सौहार्द से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

आगे क्या होगा?

फिलहाल ‘घूसखोर पंडित’ फिल्म का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि

  • क्या मेकर्स कंटेंट में बदलाव करेंगे?
  • क्या फिल्म को नया नाम दिया जाएगा?
  • या फिर इसे पूरी तरह रोक दिया जाएगा?

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