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यूपी ब्यूरो, नितिन अग्रहरि

यूपी के परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बीच एक संगठित नकल गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। हाईस्कूल परीक्षा के दौरान गणित विषय के पेपर में हुई कार्रवाई ने शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और परीक्षा संचालन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला दनियालपुर स्थित परीक्षा केंद्र से सामने आया, जहां पांच साल्वरों को रंगे हाथों पकड़ा गया। जानकारी के अनुसार, परीक्षा के दौरान असली परीक्षार्थियों की जगह बैठकर परीक्षा दे रहे पांच संदिग्ध व्यक्तियों को जांच टीम ने पकड़ लिया। जांच में यह भी पता चला कि ये साल्वर इससे पहले चार परीक्षाएं सफलतापूर्वक दे चुके थे और पांचवें पेपर के दौरान सघन जांच में उनकी पहचान उजागर हो गई। यह नकल का एक सुनियोजित और हाईटेक तरीका बताया जा रहा है, जिसमें पूरी योजना के साथ काम किया जा रहा था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रवेश पत्र और रजिस्ट्रेशन नंबर वास्तविक छात्रों के नाम पर ही जारी किए गए थे, लेकिन उन पर फोटो साल्वरों की लगाई गई थी। इससे साफ हो गया कि यह नकल का खेल पूरी तरह से मिलीभगत और संगठित तरीके से चलाया जा रहा था। प्रशासन को आशंका है कि इस गिरोह के पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है। मामले में केंद्र व्यवस्थापक, स्टैटिक मजिस्ट्रेट और सह केंद्र व्यवस्थापक की संयुक्त शिकायत पर संबंधित थाना क्षेत्र में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए साल्वरों से पूछताछ शुरू कर दी है और उनके बयान के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नकल माफिया से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अलग-अलग विद्यालयों के छात्रों की जगह साल्वरों को परीक्षा में बैठाया गया था और इसके बदले मोटी रकम ली जाती थी। प्रशासन का मानना है कि यह केवल एक स्थानीय घटना नहीं बल्कि एक संगठित नकल गिरोह की गतिविधि का हिस्सा हो सकता है। इस मामले में सीतापुर जिले के तीन विद्यालयों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। जिन संस्थानों के नाम सामने आए हैं उनमें ओपी यादव इंटर कॉलेज बिलंदा, मेवाराम विद्या ज्ञान इंटर कॉलेज और आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्पष्ट किया है कि दोष साबित होने पर इन विद्यालयों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और परीक्षा केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रों पर सघन चेकिंग और तकनीकी निगरानी बढ़ाई जाएगी। जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि नकल माफिया, संबंधित विद्यालय प्रबंधन और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके। गणित प्रश्नपत्र की परीक्षा के दौरान जिले के सभी परीक्षा केंद्रों पर विशेष जांच अभियान चलाया गया। अधिकारियों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नकल पर पूर्ण रोक लगाना आवश्यक है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।

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