कौशांबी ब्यूरो, मोहम्मद फैज कौशाम्बी जिले के सिराथू तहसील क्षेत्र में ग्राम पंचायत की जमीन पर लगे हरे और फलदार पेड़ों की कटान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पर्यावरण संरक्षण और ग्राम सभा की संपत्ति को बचाने के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया है। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन और वन विभाग भी सक्रिय हो गया है, जिससे पूरे इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सिराथू तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सेलरहा पश्चिम में हरे महुआ और आम के पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। आरोप है कि एक ठेकेदार द्वारा बिना पर्याप्त जानकारी और अनुमति के जबरन पेड़ों की कटान कराई जा रही थी। इस कटाई से ग्राम पंचायत की संपत्ति को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन पर भी खतरा मंडरा रहा था। जैसे ही इस घटना की जानकारी प्रधान प्रतिनिधि लवलेश कुमार यादव को मिली, उन्होंने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया और शुक्रवार को मंझनपुर पहुंचकर प्रभागीय वनाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की। प्रधान प्रतिनिधि ने अपनी शिकायत में बताया कि ग्राम सभा की भूमि पर लगे महुआ और आम के पेड़ केवल प्राकृतिक संपत्ति नहीं हैं, बल्कि गांव के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा भी हैं। इन पेड़ों की छांव में बच्चे खेलते हैं और ग्रामीण बैठकर आपसी संवाद करते हैं। ऐसे पेड़ों की कटान से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि गांव की सामुदायिक व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार ने बिना ग्राम पंचायत को जानकारी दिए पेड़ों की कटाई शुरू कर दी थी। मामले की सूचना मिलने पर मंझनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए ठेकेदार को हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में राहत देखने को मिली। वहीं, वन विभाग ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा कथित रूप से धोखे से अनुमति हासिल करने का मामला सामने आया है। जांच के बाद दी गई अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। वन विभाग ने साफ किया है कि बिना वैध प्रक्रिया के किसी भी हरे या फलदार वृक्ष की कटान की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्राम पंचायत सेलरहा पश्चिम के ग्रामीण अब पेड़ों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं। प्रधान प्रतिनिधि ने कहा कि ग्राम सभा की संपत्ति की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा। साथ ही प्रशासन से मांग की गई है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि पर्यावरण और ग्रामीण संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। Post navigation Prayagraj News: सर्विलांस सेल की तकनीकी कार्रवाई से लोगों को मिला उनका कीमती फोन वापस Kaushambi News: कमजोरी नहीं, एनीमिया का खतरा: मेडिकल कॉलेज ने शुरू की जागरूकता मुहिम