कौशांबी ब्यूरो, मोहम्मद फैज कौशाम्बी जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत काम कर रहे करीब 750 डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। पिछले दो महीने से मानदेय न मिलने से आर्थिक संकट झेल रहे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एसोसिएशन ऑफ कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर्स के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जल्द समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज और महामंत्री मृदुलेस कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 का कमिटेड भुगतान, परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (पीबीआई), वेलनेस एक्टिविटी का भुगतान और टीए-डीए अभी तक जारी नहीं किया गया है। इसके अलावा इंक्रीमेंट एरियर में बिना किसी स्पष्ट आदेश के कटौती किए जाने का आरोप भी लगाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सेवा शर्तों का उल्लंघन है और कर्मचारियों के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार के खिलाफ है। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में संसाधनों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि कई स्वास्थ्य केंद्रों पर वाईफाई कनेक्टिविटी, आधिकारिक सिम कार्ड, जन आरोग्य समिति (जेएएस) का फंड, आवश्यक जांच किट और सफाई कर्मचारियों के भुगतान जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इन संसाधनों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वालों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि सात दिन के भीतर उनकी मांगों पर ठोस और लिखित समाधान नहीं दिया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर उच्चाधिकारियों और सक्षम मंचों तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि वे जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए पूरी मेहनत करते हैं, लेकिन लगातार मानदेय रुकने से उनका मनोबल टूट रहा है। इस पूरे मामले ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कब तक होता है और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर को कैसे रोका जाता है। Post navigation 18 फरवरी से शुरू होंगी यूपी बोर्ड परीक्षाएं, CCTV और QR कोड से होगी निगरानी Kanpur Lamborghini Car: रईसजादे की करतूत छुपाने की साजिश का पर्दाफाश, 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग