असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर देश की सर्वोच्च न्यायपालिका ने अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि अगर किसी को चुनाव प्रक्रिया में असहमति है या उम्मीदवार की योग्यता पर सवाल है, तो यह मामला सीधे चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में उठाया जा सकता है। CJI ने स्पष्ट किया, “चुनाव सुप्रीम कोर्ट में लड़ते हैं।” याचिका का मुद्दाअसम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान कुछ नियमों का उल्लंघन किया। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि हिमंत बिस्वा सरमा की चुनावी योग्यता पर पुनर्विचार किया जाए। इस याचिका को देखते हुए CJI ने कहा कि चुनावी विवादों का हल सर्वोच्च न्यायालय में ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवारों को चुनने और चुनाव लड़ने का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है, और इस अधिकार पर तभी प्रश्न उठता है जब कोई कानूनी प्रावधान स्पष्ट रूप से उल्लंघन करता हो। CJI की टिप्पणी का महत्वCJI ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रियाओं में विवाद हमेशा न्यायिक निगरानी में आते हैं। उन्होंने यह उदाहरण दिया कि अगर किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई प्रमाणिक आरोप है, तो उसे चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत चुनौती दी जा सकती है। उन्होंने कहा, “हम पहले ही कई मामलों में यह तय कर चुके हैं कि चुनावों में किस प्रकार के मुद्दे सीधे कोर्ट में उठाए जा सकते हैं।” हिमंत बिस्वा सरमा की स्थितिअसम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस याचिका पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, उनका राजनीतिक करियर और लोकप्रियता असम में मजबूत मानी जाती है। BJP के वरिष्ठ नेता होने के नाते सरमा ने राज्य में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं और सुधार किए हैं, जिससे उनका जन समर्थन भी काफी मजबूत है। राजनीतिक विशेषज्ञों की रायराजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि CJI की टिप्पणी ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट चुनावी मामलों में निष्पक्ष और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विवाद चुनाव आयोग और कोर्ट के मार्ग से ही निपटाए जाते हैं, और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग रखकर कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है। चुनावी प्रक्रिया और कानूनी रास्ताभारतीय संविधान और चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार की योग्यता या चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति होने पर इसे न्यायिक प्रक्रिया में लाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी बार-बार स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में यह सभी का अधिकार है कि वे अपने मताधिकार का उपयोग करें और किसी भी उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी चुनौती पेश कर सकते हैं। CJI ने इस संदर्भ में यह भी कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र के स्वस्थ कामकाज के लिए जरूरी है। Post navigation यूपी में बीजेपी के गले की फांस बनती कास्ट पॉलिटिक्स? सत्ता की हैट्रिक पर मंडराता खतरा! मुर्शिदाबाद में नई मस्जिद निर्माण की तैयारी, 1200 मौलवियों को आमंत्रण