अमेरिका और रूस के बीच नई START (Strategic Arms Reduction Treaty) या अंतिम न्यूक्लियर हथियारों का समझौता अब समाप्त हो गया है. यह समझौता 2010 में हुआ था और इसके तहत दोनों देशों ने अपने लॉन्ग-रेंज न्यूक्लियर हथियारों की संख्या सीमित करने पर सहमति दी थी. लेकिन अब यह अवधि समाप्त हो चुकी है और कोई नया समझौता नहीं हुआ है. परमाणु हथियारों की रेस बढ़ने का खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते के खत्म होने के बाद दुनिया में परमाणु हथियारों की रेस फिर से तेज हो सकती है. अमेरिका और रूस दोनों ही देश अब अपने हथियारों के संख्या और शक्ति बढ़ाने पर ध्यान दे सकते हैं. इससे वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर गंभीर खतरा बढ़ गया है. दोनों देशों के बयान अमेरिका ने कहा कि वह रूस के साथ नए समझौते के लिए तैयार है, लेकिन रूस की हालिया सैन्य गतिविधियों और आक्रामक रुख के कारण वास्तविक बातचीत कठिन हो रही है. रूस की ओर से भी कहा गया है कि अमेरिका ने सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर भरोसा नहीं दिलाया, इसलिए समझौते को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. विशेषज्ञों की चेतावनी वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों की संख्या फिर से बढ़ती है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर होगा. इससे अन्य देशों को भी हथियारों की रेस में कूदने का खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति विश्व युद्ध और बड़े पैमाने पर तबाही के जोखिम को और बढ़ा सकती है. वैश्विक स्तर पर असर इस समझौते के खत्म होने से यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व में सुरक्षा तनाव बढ़ सकता है. NATO और अन्य देश भी अपनी सुरक्षा रणनीति पर फिर से विचार कर सकते हैं. वहीं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि परमाणु हथियारों का नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है. Post navigation एपस्टीन फाइल्स पूरी कहानी: कैसे भारत के नेताओं का नाम बना विवाद का हिस्सा? Explainer एपस्टीन फाइल्स 2026: दुनिया की ताकतवर हस्तियों के नाम, रहस्य और अब भी जारी विवाद