Panchayat Elections

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी के बीच राजनीति तेज़ हो गई है। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की समयसीमा 6 फरवरी से बढ़ाकर 3 मार्च कर दी है, जिससे पंचायत चुनाव की तारीखों पर सस्पेंस बना हुआ है। इसी बीच OBC आरक्षण को लेकर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भीम आर्मी चीफ और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने की मांग को लेकर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर को पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने योगी सरकार पर OBC समाज के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

चंद्रशेखर आज़ाद ने पत्र में क्या कहा?
चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने पत्र में साफ शब्दों में लिखा कि पंचायत चुनाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव हैं। अगर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों में OBC समाज को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 243D(6) राज्यों को यह अधिकार देता है कि वे पंचायतों में OBC के लिए आरक्षण लागू करें। ऐसे में OBC आरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

2023 के निकाय चुनावों का हवाला
चंद्रशेखर आज़ाद ने 2023 के नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी OBC आरक्षण को लेकर सरकार की तैयारी अधूरी थी। इसी वजह से हाईकोर्ट को चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगानी पड़ी थी। बाद में जल्दबाजी में कदम उठाए गए और पूरी चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि सरकार ने उस अनुभव से कोई सबक नहीं लिया। पंचायत चुनाव सिर पर हैं, लेकिन अब तक OBC आरक्षण को लेकर कोई स्पष्ट, समयबद्ध और पारदर्शी योजना सामने नहीं आई है।

सरकार पर उदासीनता का आरोप
चंद्रशेखर आज़ाद ने आरोप लगाया कि OBC आरक्षण को लेकर सरकार का रवैया उदासीन है। सुप्रीम कोर्ट कई बार साफ कर चुका है कि OBC आरक्षण पूरी तरह संवैधानिक है, बशर्ते तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए। लेकिन इस प्रक्रिया का इस्तेमाल आरक्षण को टालने या कमजोर करने के लिए नहीं किया जा सकता।

यूपी की राजनीति में बढ़ेगा दबाव
OBC समाज उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में पंचायत चुनाव से पहले OBC आरक्षण का मुद्दा उठना योगी सरकार और सहयोगी दलों के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है। ओम प्रकाश राजभर खुद OBC राजनीति का बड़ा चेहरा हैं, ऐसे में चंद्रशेखर आज़ाद का पत्र सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या पंचायत चुनावों से पहले OBC आरक्षण को लेकर कोई ठोस फैसला सामने आता है या नहीं।

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