अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अब खुले सैन्य टकराव की स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में अफगानिस्तान की ओर से इस्लामाबाद तक एयरस्ट्राइक किए जाने और पाकिस्तान के चार सैन्य ठिकानों पर हमले की खबरों ने पूरे दक्षिण एशिया में हलचल मचा दी है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित तौर पर हालिया सीमा-पार घटनाओं के जवाब में की गई। पिछले कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और गोलीबारी की खबरें सामने आ रही थीं। अब एयरस्ट्राइक के दावों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है। पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि उसकी वायुसेना सतर्क है और किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है, जबकि अफगान पक्ष ने इसे “रक्षात्मक प्रतिक्रिया” बताया है। बताया जा रहा है कि जिन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा है, वे रणनीतिक दृष्टि से अहम माने जाते हैं। यदि इन हमलों की पुष्टि होती है, तो यह हाल के वर्षों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है तथा नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास और सीमा विवाद इस तनाव की पृष्ठभूमि में रहे हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो यह संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संयम बरतने की अपील कर रहा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। प्रमुख सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं, अफगानिस्तान की ओर से भी सीमावर्ती इलाकों में सैन्य तैनाती मजबूत करने की खबरें हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क फिलहाल बेहद सीमित बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के सैन्य टकराव से दोनों देशों की आंतरिक राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। आर्थिक रूप से पहले से दबाव झेल रहे पाकिस्तान के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, जबकि अफगानिस्तान को भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता और स्थिरता की जरूरत है। ऐसे में लंबा सैन्य संघर्ष किसी के हित में नहीं माना जा रहा। फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत है कि दोनों देश संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। सीमा पर बढ़ता तनाव न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। Post navigation World News: इजरायल ने भारत का दिया साथ, उल्टी पड़ गई पाकिस्तान की चाल Pakistan-Afghanistan War: 22 सैन्य ठिकाने तबाह, मार गिराए 274 तालिबानी लड़ाके; PAK का बड़ा दावा