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अमेठी ब्यूरो, नितेश तिवारी

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) 2024 का परिणाम घोषित होते ही अमेठी जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। जिले के अमेठी ब्लॉक के छोटे से गांव डेहरा के रहने वाले आयुष पांडे ने पूरे प्रदेश में 10वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया। उनकी इस बड़ी सफलता के साथ ही उनका चयन उपजिलाधिकारी (SDM) पद के लिए हुआ है, जो किसी भी युवा के लिए एक प्रतिष्ठित उपलब्धि मानी जाती है। जैसे ही रिजल्ट की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की। गांव में आयुष की इस सफलता को लेकर गर्व और उत्साह साफ तौर पर देखा जा सकता है। हर कोई उनके संघर्ष और मेहनत की तारीफ कर रहा है।

आयुष पांडे की सफलता के पीछे एक प्रेरणादायक और भावुक कहानी भी जुड़ी हुई है। साल 2010 में एक सड़क दुर्घटना में उनके पिता का निधन हो गया था। उस समय परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा था। लेकिन उनकी माता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रयागराज में एक शिक्षिका के रूप में कार्य करते हुए न सिर्फ परिवार को संभाला, बल्कि अपने बच्चों की पढ़ाई में भी कोई कमी नहीं आने दी। आयुष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रतापगढ़ और प्रयागराज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया, जहां उन्होंने अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाया और सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। उनके छोटे भाई भी दिल्ली में रेलवे विभाग में कार्यरत हैं, जिससे परिवार को सहयोग मिलता रहा।

आयुष के बड़े पिता जय नारायण पांडे के अनुसार, आयुष बचपन से ही पढ़ाई के प्रति बेहद जागरूक और गंभीर रहे हैं। उनके पिता परियोजना निदेशक के पद पर कार्यरत थे, और उनके निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह से उनकी माता पर आ गई थी। उनकी माता प्रयागराज के एक इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं और उन्होंने ही दोनों भाइयों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। परिवार का शैक्षिक माहौल भी काफी मजबूत रहा है, जिसने आयुष को आगे बढ़ने में मदद की। उनके बड़े पिता गांव में कोटेदार हैं और समाज से जुड़े रहते हैं। वहीं परिवार के अन्य सदस्य भी विभिन्न सरकारी पदों पर कार्यरत हैं, जिससे शिक्षा और अनुशासन का माहौल हमेशा बना रहा। आज आयुष पांडे की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं, अगर इंसान के इरादे मजबूत हों। उनकी यह सफलता न सिर्फ अमेठी बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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