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महोबा ब्यूरो जावेद खान

उत्तर प्रदेश के महोबा में नगर पालिका का सभागार उस वक्त जंग का मैदान बन गया, जब तहबाजारी ठेका की खुली बोली के दौरान दो सभासदों के बीच तीखी नोंक-झोंक ने विवाद का रूप ले लिया। यह पूरा घटनाक्रम अधिशाषी अधिकारी (ईओ) और नगर पालिका अध्यक्ष की मौजूदगी में हुआ, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले में मूकदर्शक बने रहे। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, मामला शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित नगर पालिका परिसर का है, जहां तहबाजारी ठेका की खुली बोली प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान अधिशाषी अधिकारी अवधेश कुमार और नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार चौरसिया सहित कई सभासद और ठेकेदार मौजूद थे। बोली प्रक्रिया के बीच अचानक एक सभासद द्वारा इसे रुकवाने की कोशिश की गई, जिसका दूसरे सभासद ने विरोध किया। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और माहौल गरमा गया।

बताया जा रहा है कि विरोध करने वाले सभासद दलित वर्ग से हैं, जबकि दूसरे पक्ष के सभासद ने गुस्से में आकर उनके साथ सार्वजनिक रूप से अभद्रता शुरू कर दी। दर्जनों लोगों के सामने गाली-गलौज करते हुए उन्हें अपमानित किया गया। आरोप है कि दबंग सभासद ने न केवल अपशब्दों का इस्तेमाल किया, बल्कि लगातार उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करता रहा। यह सब कुछ ईओ और चेयरमैन के सामने होता रहा, लेकिन दोनों ही जिम्मेदार अधिकारी चुपचाप देखते रहे और किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया। इस पूरी घटना का वीडियो मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया, जो अब वायरल हो चुका है। वीडियो के सामने आने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित सभासद ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

पीड़ित का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां होती रही हैं और करोड़ों रुपये के घोटाले किए जाते रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार खुली और निष्पक्ष बोली प्रक्रिया कराई जा रही थी, जिससे नगर पालिका को अधिक राजस्व मिल सकता था। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल यह ठेका करीब 10 लाख रुपये में दिया गया था, जबकि इस बार बोली 32 लाख 77 हजार रुपये तक पहुंच गई थी। ऐसे में कुछ लोग इस प्रक्रिया को रोकना चाहते थे, ताकि पारदर्शिता न आ सके। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बोली प्रक्रिया जारी रखने की बात कही, तो दूसरे सभासद आक्रोशित हो गए और उनके साथ अभद्रता करने लगे। उनके अनुसार, उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, जो बेहद निंदनीय है।

वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार चौरसिया ने सफाई देते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और इस बार नगर पालिका को पहले से ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ है। उन्होंने माना कि बोली के दौरान दो सभासदों के बीच नोंक-झोंक हुई थी, लेकिन बाद में दोनों को समझाकर मामला शांत करा दिया गया। फिलहाल, इस घटना ने नगर पालिका में फैले कथित भ्रष्टाचार, दबंगई और प्रशासनिक निष्क्रियता को उजागर कर दिया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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