उत्तर प्रदेश के झांसी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ रिश्तों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं के इस्तेमाल—या कहें दुरुपयोग—को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। यह मामला जितना चौंकाने वाला है, उतना ही सोचने पर मजबूर करने वाला भी। घटना झांसी के बबीना थाना क्षेत्र के खैलार गांव की है, जहां रहने वाले शैलेन्द्र की शादी 19 फरवरी को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत मसीहागंज की एक युवती से हुई थी। शादी पूरे रीति-रिवाज से संपन्न हुई, सात फेरे लिए गए, और दोनों परिवारों ने इसे एक नई शुरुआत के रूप में स्वीकार किया। योजना के तहत सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जानी थी, जिससे नवविवाहित जोड़े को शुरुआती जीवन में सहारा मिल सके। शादी के बाद परिवारों के बीच यह तय हुआ कि 25 अप्रैल को धूमधाम से रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा, जिसके बाद दुल्हन की विदाई होगी। इसी कारण दुल्हन अपने मायके में ही रह रही थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन इसी बीच कहानी ने अचानक ऐसा मोड़ लिया जिसने सभी को हैरान कर दिया। आरोप है कि 10 या 11 मार्च के आसपास जैसे ही दुल्हन के खाते में योजना के तहत करीब 60 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर हुई, वह अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई। इस घटना के बाद दूल्हा शैलेन्द्र पूरी तरह टूट गया है। उसके हाथ में शादी का सर्टिफिकेट है, लेकिन साथ निभाने वाली पत्नी अब उसके साथ नहीं है। पीड़ित पति अब पुलिस के पास न्याय की गुहार लगा रहा है। उसका कहना है कि उसके साथ धोखा हुआ है—सिर्फ भावनात्मक ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी। उसने यह भी आरोप लगाया है कि शादी सिर्फ योजना का लाभ उठाने के लिए की गई थी और पहले से ही इस पूरी घटना की साजिश रची गई थी। इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक प्रेम प्रसंग का मामला है, जहां दुल्हन अपने प्रेमी के साथ चली गई? या फिर यह सरकारी योजना का सुनियोजित दुरुपयोग है? अगर ऐसा है, तो क्या ऐसी योजनाओं में और सख्ती की जरूरत है ताकि उनका गलत इस्तेमाल न हो? स्थानीय प्रशासन और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस घटना में कोई संगठित धोखाधड़ी तो नहीं हुई। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता का भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। कुल मिलाकर, यह घटना एक चेतावनी की तरह है—जहां एक तरफ रिश्तों में भरोसे की अहमियत सामने आती है, वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ होता है कि अच्छी मंशा से बनाई गई योजनाओं का गलत इस्तेमाल कैसे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर सकता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। Post navigation कांग्रेस सड़क पर उतरेगी, बिजली-पानी और महंगाई पर घेराव, अजय राय ने बताया विरोध का पूरा प्लान Farsa Wale Baba कौन? Mathura में ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत के बाद बवाल, हाईवे पर तनाव