अमेठी ब्यूरो, नितेश तिवारी 

अमेठी के जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मेहनत और समर्पण का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। यहां चार महीने तक चले इलाज के बाद एक नवजात बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ कर एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) वार्ड से डिस्चार्ज कर दिया गया। बच्ची के स्वस्थ होने से जहां डॉक्टरों में खुशी का माहौल है, वहीं परिजनों ने भी राहत की सांस ली है और डॉक्टरों की टीम का आभार जताया है।

दरअसल, यह मामला अमेठी जिला अस्पताल का है, जहां प्रतापगढ़ जिले के अठेहा गांव की रहने वाली अर्चना, पत्नी विशाल कुमार, ने 11 नवंबर 2025 को एक बच्ची को जन्म दिया था। डिलीवरी एक निजी नर्सिंग होम में हुई थी, लेकिन जन्म के समय बच्ची का वजन एक किलो से भी कम था। बच्ची की हालत काफी नाजुक थी, जिसके चलते परिजन बेहद चिंतित हो गए। जन्म के तीन दिन बाद, यानी 20 नवंबर को बच्ची को बेहतर इलाज के लिए अमेठी के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने बच्ची के इलाज की जिम्मेदारी संभाली। नवजात की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने अत्यधिक सावधानी और निगरानी के साथ इलाज शुरू किया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने कंगारू मदर केयर (Kangaroo Mother Care) पद्धति का सहारा लिया, जो कम वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए बेहद प्रभावी मानी जाती है। इस पद्धति में मां और बच्चे के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क कराया जाता है, जिससे बच्चे को गर्माहट, सुरक्षा और बेहतर पोषण मिलता है।

डॉक्टरों के लगातार प्रयास और मां की देखभाल के चलते धीरे-धीरे बच्ची की हालत में सुधार होने लगा। समय के साथ बच्ची का वजन भी बढ़ने लगा और उसकी सेहत में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा। करीब 117 दिन यानी लगभग चार महीने तक चले इलाज के बाद अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है। वर्तमान में बच्ची का वजन बढ़कर डेढ़ किलो से अधिक हो गया है, जो उसके जन्म के समय के वजन से काफी बेहतर स्थिति है।

इलाज के दौरान चाइल्ड रोग विशेषज्ञ डॉ. लैकुज्ज्मा और उनकी पूरी टीम लगातार बच्ची की निगरानी और देखभाल में जुटी रही। डॉक्टरों का कहना है कि कम वजन वाले नवजात शिशुओं का इलाज काफी चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सही देखभाल, उचित पोषण और निरंतर निगरानी से उन्हें स्वस्थ किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कंगारू मदर केयर तकनीक ने बच्ची के इलाज में अहम भूमिका निभाई।

परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल से बच्ची को लखनऊ रेफर करने की सलाह दी गई थी, लेकिन आर्थिक और अन्य परिस्थितियों के कारण वे वहां जाने में असमर्थ थे। ऐसे में उन्होंने जिला अस्पताल अमेठी में इलाज कराने का निर्णय लिया। डॉक्टरों के प्रयासों से बच्ची को नई जिंदगी मिली, जिसके लिए परिजन बेहद खुश हैं।

चार महीने के इस लंबे इलाज के बाद जब बच्ची को स्वस्थ घोषित कर एसएनसीयू वार्ड से डिस्चार्ज किया गया, तो अस्पताल में खुशी का माहौल देखने को मिला। डॉक्टरों की टीम ने इसे अपने प्रयासों की बड़ी सफलता बताया। यह मामला सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की प्रतिबद्धता का एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है।

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