बांदा ब्यूरो, राजेश गुप्ता उत्तर प्रदेश के बांदा में इंसानियत को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। शहर कोतवाली क्षेत्र के पीडब्ल्यूडी खंड-1 ओवरब्रिज के नीचे एक छोटे से परिवार की रोजी-रोटी का सहारा रही दुकान को अज्ञात लोगों ने आग के हवाले कर दिया। इस आग में सिलाई मशीनें, बैग और दुकान में रखा लगभग पूरा सामान जलकर राख हो गया। एक मेहनतकश परिवार की उम्मीदें कुछ ही मिनटों में धुएं में बदल गईं। पीड़ित विजय कुमार अपने परिवार के साथ वर्षों से उसी जगह पर छोटी-सी दुकान लगाकर सिलाई का काम करते थे। वे बैग सिलकर और मरम्मत करके किसी तरह अपने परिवार का गुजारा चलाते थे। रोज सुबह दुकान खोलते, मशीन चलाते और दिनभर मेहनत करके जो कुछ कमाते, उसी से परिवार का पेट भरता था। लेकिन किसी को क्या पता था कि एक रात उनकी मेहनत की पूरी दुनिया ही उजड़ जाएगी। बताया जा रहा है कि देर रात अज्ञात लोगों ने संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी दुकान में आग लगा दी। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान में रखा सारा सामान देखते ही देखते जलकर राख हो गया। जब सुबह आसपास के लोगों ने धुआं उठता देखा तो हड़कंप मच गया। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दुकान में रखी चार सिलाई मशीनें, तैयार और अधबने बैग, कपड़ा और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह नष्ट हो चुका था। सुबह जब विजय कुमार अपनी दुकान पर पहुंचे तो सामने का मंजर देखकर उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। जिस जगह पर कल तक उनकी मेहनत की आवाज गूंजती थी, वहां अब सिर्फ राख और जले हुए लोहे के टुकड़े पड़े थे। चार मशीनें, जिनसे उनका घर चलता था, अब काली पड़ चुकी थीं। मेहनत से तैयार किए गए बैग भी राख के ढेर में बदल चुके थे। विजय कुमार ने बताया कि इस घटना में करीब दो लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है। उनके लिए यह नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी का सहारा खत्म हो जाने जैसा है। उन्होंने बताया कि कई सालों की मेहनत और बचत से उन्होंने यह मशीनें खरीदी थीं। अब सब कुछ जलकर खत्म हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर रात के अंधेरे में किसने इस गरीब परिवार की दुकान को आग के हवाले किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी की रोजी-रोटी छीन लेना सबसे बड़ा अन्याय है। एक मेहनतकश परिवार, जो दिन-रात मेहनत करके अपने बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश कर रहा था, उसकी दुनिया इस तरह उजाड़ देना बेहद दर्दनाक है. अब विजय कुमार की आंखों में सिर्फ एक ही सवाल है आखिर उनका कसूर क्या था? जिस दुकान से उनके बच्चों का पेट भरता था, वही आज राख का ढेर बन चुकी है। परिवार के सामने अब फिर से जिंदगी शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है। उम्मीद बस इतनी है कि प्रशासन और समाज इस पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आए, ताकि उनके घर की बुझी हुई चूल्हा फिर से जल सके। Post navigation PM का कथित AI वीडियो वायरल करने का आरोप, कौशांबी से विनोद तिवारी को स्पेशल सेल ने दबोचा Kaushambi News: मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल, मानिटरिंग में सरकारी महकमा पूरी तरह फेल