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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर एक बार फिर नई हलचल तेज हो गई है। खबर है कि ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से फोन पर बातचीत की है और इस दौरान पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। इस बातचीत के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में ईरान पाकिस्तान के खिलाफ कोई सख्त कदम उठा सकता है, यहां तक कि ड्रोन या मिसाइल हमले जैसी कार्रवाई भी संभव है? सूत्रों के अनुसार, यह फोन कॉल उस समय हुई जब पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है। क्षेत्र में कई मोर्चों पर संघर्ष जारी है और कई देशों के बीच रिश्ते भी काफी तनावपूर्ण हो चुके हैं। ऐसे माहौल में ईरान ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी सुरक्षा और सीमाओं से जुड़ी किसी भी गतिविधि को वह हल्के में नहीं लेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बातचीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि उसकी जमीन का इस्तेमाल ईरान विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए। ईरान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि उसके सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय कुछ उग्रवादी समूह पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल करते हैं और वहां से ईरान में हमले करते हैं। यही वजह है कि समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव भी देखने को मिलता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर सीमा पार से होने वाली गतिविधियों को लेकर ईरान को गंभीर खतरा महसूस होता है, तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है। पिछले वर्षों में भी ईरान ने अपने सुरक्षा हितों का हवाला देते हुए सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन और मिसाइल हमलों का सहारा लिया है। ऐसे में मौजूदा हालात में यह आशंका और भी बढ़ जाती है कि अगर तनाव बढ़ा तो स्थिति ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है।

हालांकि पाकिस्तान की ओर से अभी तक इस बातचीत पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वह पहले से ही कई क्षेत्रीय और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में ईरान के साथ किसी भी तरह का सैन्य तनाव उसके लिए नई मुश्किलें पैदा कर सकता है। दूसरी ओर, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दोनों देश पूरी तरह से टकराव की स्थिति से बचना चाहेंगे। ईरान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बने हुए हैं और दोनों देशों के लिए क्षेत्रीय स्थिरता भी अहम है। इसलिए संभावना यही जताई जा रही है कि फिलहाल दोनों देश बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों के जरिए ही स्थिति को संभालने की कोशिश करेंगे।

फिर भी मिडिल ईस्ट में जारी व्यापक तनाव के कारण हर छोटी घटना भी बड़े संकट का रूप ले सकती है। अगर किसी भी पक्ष की ओर से आक्रामक कदम उठाया जाता है, तो उसका असर सिर्फ ईरान और पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि ईरान और पाकिस्तान के बीच यह तनाव आगे किस दिशा में जाता है। क्या दोनों देश बातचीत से समाधान निकाल पाएंगे या हालात और ज्यादा बिगड़ेंगे यह आने वाला समय ही बताएगा।

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