दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब नीति घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। इस सूची में पूर्व सांसद के. कविता का नाम भी शामिल है। अदालत के इस फैसले ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है। हालांकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है, जिससे कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं मानी जा रही। 510 दिन सिसोदिया, 177 दिन केजरीवाल इस मामले में गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं को लंबी अवधि तक जेल में रहना पड़ा। मनीष सिसोदिया ने लगभग 510 दिन जेल में बिताए, जबकि अरविंद केजरीवाल करीब 177 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहे। इन आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि उनके नेताओं को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया और लंबे समय तक जेल में रखा गया, जबकि विपक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों ने कानून के तहत कार्रवाई की। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस चली। अदालत ने साक्ष्यों और दलीलों का मूल्यांकन करने के बाद सभी आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के बाद AAP समर्थकों में खुशी की लहर देखी गई, वहीं भाजपा नेताओं ने कहा कि अंतिम फैसला अभी उच्च न्यायालय में होना बाकी है। CBI ने हाई कोर्ट का रुख किया, सियासी घमासान जारी राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद CBI ने इसे चुनौती देने की घोषणा की। एजेंसी का मानना है कि मामले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में जाएगा, जहां आगे की सुनवाई होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। शराब नीति को लेकर पहले ही दिल्ली की राजनीति में तीखी बयानबाजी हो चुकी है। फैसले के बाद आम आदमी पार्टी इसे “सत्य की जीत” बता रही है, जबकि भाजपा इसे “अस्थायी राहत” करार दे रही है। शराब नीति मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा। गिरफ्तारी, जांच, जमानत और अब बरी होने तक का सफर लंबा और विवादों से भरा रहा है। इस दौरान राजनीतिक रैलियों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। फिलहाल अदालत के इस फैसले ने एक बड़ा मोड़ जरूर दिया है, लेकिन CBI की अपील के बाद अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या निचली अदालत का फैसला बरकरार रहता है या मामले में कोई नया कानूनी मोड़ आता है। Post navigation अमेठी में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में न्याय की जीत, दोषी को 10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा Israel-India News: इजरायल देगा हर साल 10 हजार भारतीयों को नौकरी?