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कौशांबी ब्यूरो, मोहम्मद फैज

कौशांबी जिले के विकासखंड मूरतगंज स्थित जलालपुर बोरियों के एक प्राथमिक विद्यालय में गमला टूटने की मामूली घटना ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कक्षा 5 के छात्र आदित्य कुमार द्वारा विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आशा देवी पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र ने आरोप लगाया है कि गमला टूटने के बाद उससे 1000 रुपये का जुर्माना मांगा गया, स्कूल से बाहर निकाल दिया गया और पुलिस बुलाने की धमकी दी गई। घटना के सामने आते ही छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ गई और शिक्षा विभाग पर कार्रवाई का दबाव बन गया है।

छात्र आदित्य कुमार के अनुसार 25 फरवरी को वह अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान खेल-खेल में एक गमला टूट गया। आदित्य का कहना है कि गमला टूटने पर प्रधानाध्यापिका ने उसे डांटते हुए स्कूल परिसर से बाहर कर दिया और गेट बंद करा दिया। वह किसी तरह घर पहुंचा और अपने माता-पिता को पूरी घटना बताई। जब उसके माता-पिता स्कूल पहुंचे तो कथित रूप से उनसे 1000 रुपये जुर्माने के रूप में जमा करने को कहा गया। परिवार का आरोप है कि रकम न देने की स्थिति में डायल 112 पुलिस बुलाने की चेतावनी भी दी गई।

घटना की जानकारी मिलते ही Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (एबीवीपी) के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। संगठन के जिला संयोजक शिवांशु शुक्ला ने इस प्रकरण को गंभीर बताते हुए कहा कि प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले एक छोटे बच्चे के साथ इस तरह का व्यवहार शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल अनुशासनात्मक बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अनुचित है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने बेसिक शिक्षा अधिकारी, कौशाम्बी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान अश्वनी सिंह, सुशील सोनकर, प्रिंस कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

दूसरी ओर प्रधानाध्यापिका आशा देवी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि गमला टूटने के बाद छात्र को केवल इतना कहा गया था कि वह अपने अभिभावकों को बुला ले, ताकि उन्हें घटना की जानकारी दी जा सके और भविष्य में सावधानी बरती जाए। उन्होंने 1000 रुपये जुर्माना मांगने और पुलिस बुलाने की धमकी देने के आरोपों को निराधार बताया। प्रधानाध्यापिका के अनुसार कुछ लोग विद्यालय परिसर में आए, फोटो और वीडियो बनाए तथा बिना पूरी जानकारी के मामले को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरे प्रकरण की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी है और जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

यह मामला अब शिक्षा विभाग के लिए एक परीक्षा की तरह बन गया है। एक ओर छात्र और उसके परिजन हैं, जो न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यालय प्रशासन है, जो स्वयं को निर्दोष बता रहा है। स्थानीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। कई अभिभावक चाहते हैं कि जांच पारदर्शी तरीके से हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

फिलहाल सबकी निगाहें शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी हैं। गमला टूटने की एक छोटी सी घटना ने जिस तरह प्रशासनिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है, वह बताती है कि स्कूलों में अनुशासन और संवाद दोनों का संतुलन कितना जरूरी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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