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बलिया ब्यूरो, सागर गुप्ता

बलिया जिला से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुतहा ताल और सलेमपुर सुरहा ताल क्षेत्र, जो प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आश्रय के रूप में जाना जाता है, आज शिकारियों के खूनी खेल का मैदान बनता नजर आ रहा है। इस इलाके में हजारों किलोमीटर का सफर तय कर आने वाले दुर्लभ पक्षियों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है।

मामला तब सुर्खियों में आया जब बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के हटियाडीह इलाके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में कथित तौर पर कुछ शिकारी बेखौफ होकर प्रवासी पक्षियों का शिकार करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो ने स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से इलाके में अवैध शिकार का धंधा चल रहा है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों के अनुसार प्रवासी पक्षियों का शिकार एक गंभीर अपराध माना जाता है। भारतीय कानून के तहत Wildlife Protection Act, 1972 के अंतर्गत प्रवासी पक्षियों के शिकार पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों को भारी जुर्माना और कारावास तक की सजा हो सकती है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि धरातल पर इस कानून का प्रभाव कमजोर दिखाई देता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी पक्षियों का संरक्षण केवल कानूनी नहीं बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिहाज से भी जरूरी है। ये पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय करके यहां आते हैं और स्थानीय जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि लगातार इनका शिकार होता रहा तो इसका असर पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ सकता है।

स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण शिकारियों के हौसले बुलंद हैं। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद इलाके में नियमित गश्त नहीं बढ़ाई गई। कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि रात के समय अवैध शिकार ज्यादा होता है, जिससे प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठ रही है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में जांच की बात कही गई है। स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीमों से भी रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अगर वन्यजीव संरक्षण को लेकर सख्ती नहीं बरती गई तो आने वाले समय में पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस वायरल वीडियो के बाद शिकारी गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होगी या फिर मामला केवल जांच तक ही सीमित रह जाएगा।

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