उत्तर प्रदेश के कौशांबी जनपद की चायल तहसील के ग्राम चकमाहपुर में एक निर्माणाधीन मकान गिराए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवार ने राजस्व विभाग के कानूनगो शरफराज पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कथित रूप से पैसे लेकर यह कार्रवाई कराई गई है। वहीं इस घटना के बाद पूरे इलाके में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। परिवार के मुताबिक, संजय नामक व्यक्ति अपने घर का निर्माण करवा रहा था। इसी दौरान राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कहा की ही गांव समाज की जमीन है, इतने में ही निर्माणाधीन हिस्से को गिरा दिया। परिवार का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के की गई। उनका कहना है कि अगर जमीन को लेकर संदेह था तो प्रशासन को पहले नोटिस देकर सुनवाई करनी चाहिए थी। संजय के परिजनों का कहना है कि कानूनगो शरफराज ने कथित तौर पर पैसे लेकर यह कार्रवाई करवाई। परिवार ने आरोप लगाया कि अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनका मकान गिराने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।घटना के बाद गांव में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक़ ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी निर्माण को अवैध माना जाता है तो प्रशासन को तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन यहां सवाल यह उठ रहा है कि क्या वास्तव में नियमों का पालन किया गया या फिर जल्दबाजी में कार्रवाई कर दी गई।स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि अगर निर्माण गलत था तो क्या उसके संबंध में पहले कोई नोटिस जारी किया गया था? क्या राजस्व अभिलेखों की जांच की गई थी? क्या संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया गया था? इन सवालों के जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।इस पूरे मामले में कानूनगो शरफराज की भूमिका भी चर्चा में है। ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी अधिकारी को बिना पूरी प्रक्रिया अपनाए इस तरह से निर्माण गिराने का अधिकार है? अगर आरोप सही हैं तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। फिलहाल इस घटना को लेकर पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। नियम क्या कहता है?उत्तर प्रदेश में ग्राम समाज या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में कार्रवाई उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत की जाती है। आम तौर पर धारा 67 के अंतर्गत पहले कब्जा करने वाले व्यक्ति को नोटिस दिया जाता है।नियम के अनुसार प्रशासन को पहले नोटिस जारी कर संबंधित व्यक्ति से जवाब मांगा जाता है और उसे सुनवाई का अवसर दिया जाता है। इसके बाद अगर कब्जा अवैध पाया जाता है तो तहसील प्रशासन द्वारा उसे हटाने या निर्माण गिराने का आदेश दिया जाता है। ऐसे में चकमाहपुर की इस घटना को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संजय के मामले में इन नियमों का पालन किया गया था या नहीं। अगर बिना नोटिस या सुनवाई के कार्रवाई की गई है तो यह भी जांच का विषय बन सकता है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज है और लोग प्रशासन से स्पष्ट जवाब की उम्मीद कर रहे हैं।, वहीं इस मामले की जानकारी के लिए कानूनगो को फ़ोन किया गया, मगर कॉल नहीं रिसीव हुआ। Post navigation प्रयागराज में सजने लगे होली बाजार, भीम का भगवा गदाला और कार्टून मुखौटे, बिक्री तेज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन उत्पीड़न का केस, इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल