यूपी ब्यूरो, नितिन अग्रहरि

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के चोपन ब्लॉक स्थित सिंदुरिया ग्राम पंचायत में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फर्क सामने आया है। यहां के ग्रामीणों ने शुद्ध पेयजल की मांग को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। “हर घर नल योजना” के तहत पानी न मिलने से नाराज पुरुष और महिलाएं सोन नदी में उतर गए और जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। कई लोग अर्धनग्न होकर नदी में बैठे, जो उनके गुस्से और बेबसी का प्रतीक था।

ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो से तीन साल पहले गांव में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों की खुदाई की गई थी। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि अब उनके घरों में साफ पानी पहुंचेगा। लेकिन समय बीतता गया और आज तक नलों से एक बूंद पानी नहीं आया। गांव की कई गलियां खुदी पड़ी हैं और पाइपलाइन अधूरी हालत में दिखाई देती है। लोगों का आरोप है कि कागजों में काम पूरा दिखाकर फाइलें बंद कर दी गईं, लेकिन धरातल पर जलापूर्ति शुरू ही नहीं हुई। सिंदुरिया गांव के लोग आज भी नदी के पानी पर निर्भर हैं। यह पानी साफ नहीं है और बरसात के दिनों में तो और भी दूषित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें यही पानी पीना पड़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में लोग सोन नदी में उतर गए और एक दिन का जल सत्याग्रह किया। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और भ्रष्टाचार तथा लापरवाही के आरोप लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक हर घर में नल से पानी नहीं पहुंचेगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका यह भी कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। “हर घर नल योजना” का मकसद हर परिवार तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, ताकि लोगों को दूर-दूर से पानी न लाना पड़े और दूषित जल से होने वाली बीमारियों से बचाव हो सके। लेकिन सिंदुरिया ग्राम पंचायत में यह योजना अब तक सफल नहीं हो पाई है। गांव वालों का मानना है कि अगर समय रहते काम पूरा कर दिया जाता तो आज उन्हें नदी में उतरकर प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं पड़ती। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तुरंत जांच कराए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही अधूरे काम को जल्द से जल्द पूरा कर गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू की जाए। फिलहाल गांव में पानी को लेकर असंतोष बना हुआ है और लोग अपने हक के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।

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