यूपी ब्यूरो, नितिन अग्रहरि

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में इन दिनों भक्ति और विचार का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। जनपद के बढ़नी मिश्र गांव में 18 फरवरी से 26 फरवरी तक भव्य रामकथा का आयोजन किया गया है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा का वाचन कर रहे हैं प्रख्यात संत और विद्वान Jagadguru Rambhadracharya। उनके प्रवचनों में जहां एक ओर रामभक्ति और आध्यात्मिक संदेश की गूंज सुनाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर समसामयिक मुद्दों पर भी उनके विचार चर्चा का विषय बने हुए हैं। रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े प्रस्तावित कानून को लेकर केंद्र सरकार को खुली नसीहत दी। उन्होंने कहा कि इस कानून पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि प्रस्तावित व्यवस्था से समाज में भेदभाव की भावना पैदा हो सकती है और यह देश की एकता और सौहार्द के लिए ठीक नहीं होगा।

‘सौहार्द बनाए रखना है तो कानून पर पुनर्विचार हो’

कथा के मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि देश में सामाजिक संतुलन और शांति बनाए रखनी है, तो सरकार को इस कानून पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि समय रहते इस विषय पर ध्यान नहीं दिया गया तो समाज में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जगद्गुरु ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके धर्माचार्य रहते इस प्रकार का कानून लागू नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि देशहित और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को वापस लेने पर विचार किया जाए।

उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप मान रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक मंच से दिया गया राजनीतिक संदेश भी बता रहे हैं। हालांकि रामकथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने उनके वक्तव्य का समर्थन किया और कहा कि संत समाज की बात समाज और देश के हित में होती है। रामकथा में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्ति गीत, रामायण के प्रसंग और संत के विचारों से माहौल आध्यात्मिक बना हुआ है। लेकिन इसी मंच से उठे इस बयान ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय चर्चा से भी जोड़ दिया है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इस विषय पर क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल बस्ती की यह रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विचार-विमर्श का भी केंद्र बन गई है।

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