AI Summit protest

नई दिल्ली में आयोजित एआई इंडिया समिट 2026 के दौरान यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस विरोध को लेकर कई प्रमुख राजनीतिक दलों और नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच के लिहाज से अनुचित बताया है।

समिट का आयोजन देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी निवेश और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। इसमें देश-विदेश के नीति-निर्माता, टेक कंपनियों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हुए थे। इसी दौरान यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर शर्टलेस होकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे कार्यक्रम में कुछ समय के लिए व्यवधान उत्पन्न हुआ।

बसपा प्रमुख Mayawati ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में इस तरह का व्यवहार “देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला” है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसके लिए मर्यादा और मंच की गरिमा का ध्यान रखना जरूरी है। मायावती ने इसे “अनुशासनहीन और गैर-जिम्मेदाराना” कदम बताया।

समाजवादी पार्टी के नेता Akhilesh Yadav ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समिट जैसे मंच पर इस तरह का प्रदर्शन देश के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि राजनीतिक असहमति जताने के लिए कई संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके मौजूद हैं।

तेलुगु देशम पार्टी के नेता Nara Lokesh ने इसे “अंतरराष्ट्रीय मंच का अनादर” बताया। उनका कहना था कि जब दुनिया भर के प्रतिनिधि भारत में निवेश और तकनीकी साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करने आए हों, तब इस तरह के दृश्य गलत संदेश देते हैं।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री Y. S. Jagan Mohan Reddy ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में संयम और जिम्मेदारी अपेक्षित होती है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में देश की सकारात्मक छवि को बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता K. T. Rama Rao ने भी सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जो संदेश तो दे, लेकिन देश की प्रतिष्ठा को आघात न पहुंचाए। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों और संवाद की परंपरा को मजबूत करने की अपील की।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक व्यापक बहस को जन्म दिया है—क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस प्रकार का विरोध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा माना जाना चाहिए, या इसे राष्ट्रीय छवि के संदर्भ में अनुचित समझा जाए? कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक मंचों पर होने वाले कार्यक्रमों में सुरक्षा और प्रोटोकॉल की सख्ती पहले से ही अधिक होती है, इसलिए ऐसे विरोध तुरंत सुर्खियां बन जाते हैं।

वहीं, यूथ कांग्रेस की ओर से यह दलील दी जा रही है कि उनका उद्देश्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना था, न कि देश की छवि को नुकसान पहुंचाना। हालांकि विरोध के तरीके को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।

फिलहाल, यह मुद्दा सिर्फ एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने राजनीतिक शिष्टाचार, लोकतांत्रिक अधिकारों और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के बीच संतुलन की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस पर और सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

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