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उत्तर प्रदेश के संभल की रहने वाली मुस्लिम युवती तमन्ना मलिक इन दिनों अपनी आस्था और मन्नत की कहानी को लेकर चर्चा में हैं। तमन्ना ने भगवान शिव से एक विशेष मन्नत मांगी थी—“अमन त्यागी से शादी करा दो भोलेनाथ, कांवड़ लाऊंगी।” उनका कहना है कि जब उनकी यह मुराद पूरी हो गई, तो उन्होंने वचन निभाने के लिए कांवड़ यात्रा करने का निर्णय लिया।

तमन्ना इस समय Haridwar से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। उनके साथ कई शिवभक्त भी चल रहे हैं। रास्ते भर ‘बोल बम’ के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच तमन्ना पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनी यात्रा पूरी कर रही हैं। उनका कहना है कि आस्था किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति के विश्वास और भावनाओं से जुड़ी होती है।

तमन्ना ने बताया कि उन्होंने भगवान शिव से मन ही मन प्रार्थना की थी कि यदि उनकी शादी अमन त्यागी से हो जाती है तो वह कांवड़ लाकर जलाभिषेक करेंगी। जब उनकी यह इच्छा पूरी हुई, तो उन्होंने अपनी मन्नत के अनुसार कांवड़ यात्रा शुरू की। उनका कहना है कि यह उनके लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आभार व्यक्त करने का माध्यम है।

कांवड़ यात्रा उत्तर भारत में सावन माह के दौरान आयोजित होने वाली एक प्रमुख धार्मिक परंपरा है। श्रद्धालु हरिद्वार या अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लाकर अपने-अपने क्षेत्र के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं और इसे आस्था, समर्पण और संकल्प का प्रतीक माना जाता है।

तमन्ना के इस कदम को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक सद्भाव और आपसी भाईचारे का उदाहरण मान रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बता रहे हैं। तमन्ना का कहना है कि उन्होंने यह निर्णय पूरी श्रद्धा और अपनी इच्छा से लिया है। उनके अनुसार, भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास किसी सीमारेखा को नहीं मानता।

यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय है। कांवड़ मार्गों पर पुलिस और स्वयंसेवी संगठन श्रद्धालुओं की सहायता कर रहे हैं। तमन्ना के साथ चल रहे शिवभक्तों का कहना है कि उनकी यह यात्रा आपसी सौहार्द का संदेश देती है और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।

तमन्ना मलिक की यह कहानी आस्था, विश्वास और संकल्प की मिसाल के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने अपनी मन्नत पूरी होने पर जो वचन निभाया, वह उनके लिए आध्यात्मिक संतोष का कारण है। उनकी यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत श्रद्धा की अभिव्यक्ति है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि विविधता में एकता भारतीय समाज की एक महत्वपूर्ण पहचान है।

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