Narendra Modi ने असम की राजधानी Guwahati में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस और अधिक “जहरीली” हो गई है तथा असम की जनता को सतर्क रहने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त कोशिशों से बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि जिन शक्तियों ने लंबे समय तक विकास को बाधित किया, वे अब जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस जब सत्ता में थी, तब उसने पूर्वोत्तर की उपेक्षा की, लेकिन अब जब वह सत्ता से बाहर है तो नकारात्मक राजनीति के जरिए माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि असम आज शांति, स्थिरता और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में उग्रवाद की घटनाओं में कमी आई है और निवेश का माहौल बेहतर हुआ है। उन्होंने विभिन्न बुनियादी परियोजनाओं, सड़क और रेल नेटवर्क के विस्तार, तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर को देश के विकास का इंजन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल लोगों के बीच भ्रम और विभाजन पैदा करने की राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना का स्वागत है, लेकिन देश और राज्य के हितों के खिलाफ काम करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। प्रधानमंत्री ने जनता से अपील की कि वे विकास और स्थिरता के एजेंडे को प्राथमिकता दें और किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार से सावधान रहें।

सभा में प्रधानमंत्री ने असम की सांस्कृतिक विरासत और पहचान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि असम की परंपराएं, भाषा और कला देश की विविधता को मजबूत करती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राज्य की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। असम में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है, और ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के बयान राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में जनता को विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि असम की तरक्की पूरे पूर्वोत्तर और देश की प्रगति से जुड़ी है। उनका संदेश स्पष्ट था कि राज्य को आगे बढ़ाने के लिए स्थिरता, सहयोग और सकारात्मक राजनीति की आवश्यकता है। इस बयान के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। गुवाहाटी की इस रैली ने एक बार फिर असम की राजनीति को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है, और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

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