अमेरिका से उठी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। इसका सीधा असर भारत समेत दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ा है। खासकर टेक सेक्टर में तेजी से बढ़ती AI प्रतिस्पर्धा ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। इसी डर और अनिश्चितता के माहौल में शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों ने अचानक यू-टर्न लेते हुए मजबूती दिखानी शुरू कर दी। विशेषज्ञों के अनुसार, हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में AI से जुड़ी कंपनियों के बीच तेज प्रतिस्पर्धा और टेक सेक्टर में बड़े बदलावों की आशंका ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका असर सीधे तौर पर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने टेक और आईटी सेक्टर के शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के कारण कई पारंपरिक कंपनियों के कारोबार पर खतरा मंडरा रहा है। कई बड़ी कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल को बदलने के लिए मजबूर हो रही हैं। इसी अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया। इसका फायदा सीधे तौर पर गोल्ड और सिल्वर को मिला। गिरावट के दौर में सोने और चांदी की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने इसे सुरक्षित निवेश मानते हुए इन धातुओं में पैसा लगाना शुरू कर दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब भी वैश्विक आर्थिक या तकनीकी संकट की आशंका होती है, तब निवेशक पारंपरिक रूप से सोने और चांदी को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। यही वजह रही कि शेयर बाजार के गिरते ही इनकी मांग बढ़ गई और कीमतों में उछाल देखने को मिला। इसके अलावा, अमेरिका में ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता भी बाजार पर असर डाल रही है। अगर अमेरिका में ब्याज दरों में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर दुनियाभर के निवेश बाजारों पर पड़ता है। निवेशकों को डर है कि AI सेक्टर में तेज बदलाव से कई कंपनियों की वैल्यूएशन प्रभावित हो सकती है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। भारतीय बाजार में आईटी और टेक कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हो गया। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे अस्थायी गिरावट मान रहे हैं और उनका कहना है कि AI लंबी अवधि में बाजार के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकता है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि निवेशकों को इस समय जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव तकनीकी बदलावों के दौरान सामान्य माना जाता है। निवेशकों को संतुलित पोर्टफोलियो बनाकर सुरक्षित और जोखिम वाले दोनों प्रकार के निवेश को संतुलित रखना चाहिए। फिलहाल, वैश्विक बाजार AI की तेजी से बदलती दुनिया के प्रभाव को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में यह तकनीक बाजार को नई दिशा दे सकती है, लेकिन फिलहाल इसकी वजह से निवेशकों में असमंजस और सतर्कता का माहौल बना हुआ है। Post navigation इमरान की सेहत पर चिंता, ‘लगभग अंधे’ होने के दावों से पाकिस्तान की राजनीति में हलचल India–Bangladesh Relations: क्या भारत-बांग्लादेश रिश्तों में शुरू होगा नया अध्याय?,