दिल्ली स्थित कृषि भवन परिसर में मौजूद करीब 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाए जाने की आशंका ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। हाल ही में जारी किए गए नए टेंडर के बाद वक्फ बोर्ड की चिंता बढ़ गई है। बोर्ड का कहना है कि जिस क्षेत्र में निर्माण कार्य प्रस्तावित है, वहां यह ऐतिहासिक मस्जिद मौजूद है, जिसे हटाने या प्रभावित करने का खतरा पैदा हो गया है। वक्फ बोर्ड ने पहले भी अदालत के सामने यह दावा किया था कि संबंधित मस्जिद सरकारी भवन से भी पुरानी है और लंबे समय से वहां इबादत की जा रही है। बोर्ड का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य के कारण मस्जिद को नुकसान पहुंचता है तो यह आस्था के साथ-साथ विरासत पर भी चोट होगी। वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्ला खान ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि सरकार ने अदालत में स्पष्ट तौर पर भरोसा दिलाया था कि निर्माण कार्य के दौरान मस्जिदों को प्रभावित नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि नए टेंडर से ऐसा लग रहा है कि पहले दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब और मस्जिद की सुरक्षा की गारंटी मांगी है। जानकारी के अनुसार, कृषि भवन परिसर में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कुछ बड़े निर्माण कार्यों की योजना बनाई जा रही है। इसी सिलसिले में जारी टेंडर को लेकर वक्फ बोर्ड ने आशंका जताई है कि निर्माण गतिविधियों से मस्जिद की संरचना या अस्तित्व प्रभावित हो सकता है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस मसले को लेकर कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। वहीं, सरकारी सूत्रों का कहना है कि अभी तक मस्जिद को हटाने का कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का दावा है कि सभी निर्माण कार्य नियमानुसार और कानून के दायरे में रहकर किए जाएंगे। साथ ही धार्मिक स्थलों को लेकर संवेदनशीलता बरतने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, टेंडर जारी होने के बाद विवाद तेज हो गया है और विभिन्न संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जतानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में तेजी से हो रहे शहरी विकास के बीच ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। ऐसे मामलों में संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती साबित होता है। यदि मस्जिद वास्तव में ऐतिहासिक महत्व रखती है तो उसके संरक्षण को लेकर गंभीर प्रयास किए जाने की आवश्यकता होगी। फिलहाल इस पूरे मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वक्फ बोर्ड इस मस्जिद की सुरक्षा को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास तेज करने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में अदालत और प्रशासनिक स्तर पर लिए जाने वाले फैसले से ही तय होगा कि यह कदीमी मस्जिद सुरक्षित रह पाएगी या नहीं। Post navigation “स्पीकर के कमरे में महाभारत!” रिजिजू का बड़ा आरोप, कांग्रेस सांसदों पर हंगामे का दावा 3.25 लाख करोड़ की डील को मिली मंजूरी, तीनों सेनाओं के बड़े प्रस्ताव भी DAC से पास