संवाददाता- संजय खान संभल हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अनुज चौधरी को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। मामले की सुनवाई सोमवार और मंगलवार को हुई। यूपी सरकार और ASP अनुज चौधरी की ओर से दाखिल याचिकाओं में निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने फिलहाल ASP अनुज चौधरी को अंतरिम राहत देते हुए मामले की अगली सुनवाई पांच हफ्ते बाद तय की है। इस विवाद की शुरुआत 24 नवंबर 2024 से हुई थी। संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय निवासी यामीन ने CJM कोर्ट में याचिका दायर की। यामीन का आरोप था कि उनका बेटा आलम उस दिन रस्क (टोस्ट) बेचने घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद के पास पहुंचते ही पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। यामीन ने तत्कालीन संभल सीओ अनुज चौधरी, कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया। 9 जनवरी 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। यामीन के वकील चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया कि उनके मुवक्किल के बेटे ने पुलिस से छिपकर अपना इलाज कराया। कोर्ट से उन्होंने ASP अनुज चौधरी और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। हालांकि, ASP अनुज चौधरी इस समय फिरोजाबाद जिले में तैनात हैं। SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा था कि हिंसा की ज्यूडिशियल इनक्वायरी पहले ही पूरी हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि FIR दर्ज नहीं की जाएगी और इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी। संभल हिंसा के पीछे जामा मस्जिद को लेकर विवाद भी था। हिंदू पक्ष का दावा था कि यह मस्जिद पहले हरिहर मंदिर थी, जिसे बाबर ने 1529 में तोड़कर मस्जिद बनवाया था। 19 नवंबर 2024 को इस पर याचिका दायर की गई और कोर्ट ने मस्जिद के अंदर सर्वे के आदेश दिए। रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया। उसी दिन सर्वे टीम मस्जिद पहुंची और दो घंटे का सर्वे किया। 24 नवंबर को पुनः मस्जिद का सर्वे किया गया, जिसके दौरान हिंसा भड़की। हिंसा में 24 नवंबर 2024 को चार लोगों की मौत हुई थी। यामीन ने अपने बेटे के साथ हुई घटना के लिए तत्कालीन संभल सीओ और अन्य पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। इस मामले में CJM कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया, जो अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ASP अनुज चौधरी को अंतरिम राहत दी जा सकती है। इस बीच, मामले की अगली सुनवाई पांच हफ्ते बाद होगी। उच्च न्यायालय का यह फैसला यूपी पुलिस और राज्य सरकार के लिए राहत लेकर आया है। संभल हिंसा मामला और जामा मस्जिद सर्वे विवाद पूरे देश की नजर में रहा। इस घटना ने धार्मिक और प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल खड़े किए। FIR दर्ज करने का आदेश और हाईकोर्ट की रोक ने विवाद को और भी संवेदनशील बना दिया है। अब अदालत की अगली सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। Post navigation प्रयागराज: बैंक इम्प्लाइज बिल्डिंग में जिस्मफरोशी का धंधा, पुलिस ने छापा मारा उधारी चुकाने के लिए सर्राफा व्यापारी ने खुद रची लूट की साजिश, पुलिस ने किया खुलासा