प्रयागराज में एक बार फिर प्रशासन और एक प्रमुख चेहरे के बीच टकराव ने सुर्खियां बटोर ली हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के प्रकरण के बाद अब चर्चित सनातनी फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र प्रशासनिक अनुमति को लेकर विवाद के केंद्र में आ गए हैं। मामला उनकी आगामी फिल्म “द डायरी ऑफ मणिपुर” के पहले लुक और टीज़र लॉन्च से जुड़ा है, जिसे वे माघ मेले के समापन के बाद प्रयागराज में जारी करना चाहते थे। सनोज मिश्र ने एक बयान जारी कर प्रशासन पर अनुमति न देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब मेला क्षेत्र पूरी तरह खाली हो चुका है और किसी प्रकार की भीड़ या अव्यवस्था की संभावना नहीं है, तब भी उन्हें कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी जा रही। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “अब जेल ही क्यों न हो जाए, फिल्म का पहला लुक निर्धारित समय पर जारी होगा।” सनोज मिश्र खुद को लंबे समय से सनातन विचारधारा से जुड़े फिल्मकार के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनकी पिछली फिल्मों को लेकर उन्हें कई तरह के विरोध और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, फिल्म “राम की जन्मभूमि” के दौरान उनके घर पर हमला हुआ। “काशी टू कश्मीर” के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों से धमकियां मिलीं। “गजनवी” फिल्म के निर्माण के समय जान का जोखिम उठाना पड़ा। वहीं “द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल” को लेकर पश्चिम बंगाल में उन्हें कानूनी कार्रवाइयों और राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा, यहां तक कि उन्हें राज्य छोड़ना पड़ा। अपनी नई फिल्म “द डायरी ऑफ मणिपुर” के बारे में उन्होंने बताया कि यह पूर्वोत्तर भारत में धर्म परिवर्तन, आरक्षण और सामाजिक असंतुलन जैसे मुद्दों पर आधारित है। उनके मुताबिक, इस फिल्म के पहले पोस्टर को मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह ने जारी किया था। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सहयोग का भी उल्लेख किया। सनोज मिश्र का कहना है कि यह फिल्म “राष्ट्र और संस्कृति से जुड़े सवालों” को सामने लाने का प्रयास है।इस फिल्म की एक खास बात यह भी बताई जा रही है कि इसमें महाकुंभ क्षेत्र की एक गरीब लड़की मोनालिसा को शिक्षित कर अभिनेत्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। निर्देशक का दावा है कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की कहानी भी है। हालांकि प्रयागराज प्रशासन की ओर से अभी तक औपचारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और अनुमति प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। प्रशासन का तर्क हो सकता है कि संवेदनशील विषयों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब महाकुंभ और माघ मेले जैसे आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी रहती है। ऐसे में किसी भी फिल्म के टीज़र लॉन्च जैसे कार्यक्रम को लेकर प्रशासन सतर्क रुख अपना रहा है।अब सवाल यह है कि क्या यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम प्रशासनिक प्रक्रिया का बनता जा रहा है, या फिर यह सिर्फ अनुमति संबंधी औपचारिकता का विवाद है? सनोज मिश्र का तेवर साफ है—वे हर हाल में तय समय पर फिल्म का पहला लुक जारी करेंगे। यदि ऐसा होता है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होती है।फिलहाल प्रयागराज की सियासत और सांस्कृतिक हलचल दोनों ही इस टकराव पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। Post navigation अल्लू अर्जुन ने ‘पुष्पा 2’ से कितना कमाया? नई रिपोर्ट ने खोले चौंकाने वाले आंकड़े महाकुंभ मेले से वायरल हुई मोनालिसा की पहली फिल्म की झलक, टीजर रिलीज हुआ: देखें VIDEO