संवाददाता- संजय खान, प्रयागराज उत्तराखंड के हरिद्वार में वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में हरिद्वार प्रशासन और उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रयागराज पहुंचेगा। यह प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय प्रवास के दौरान प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ और माघ मेला के दौरान विकसित की गई व्यवस्थाओं का गहन और व्यावहारिक अध्ययन करेगा। दरअसल, प्रयागराज महाकुंभ को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है, जहां करोड़ों श्रद्धालु स्नान पर्वों के दौरान संगम तट पर जुटते हैं। ऐसे विशाल आयोजन के सफल संचालन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन द्वारा अपनाए गए आधुनिक प्रबंधन मॉडल को अब हरिद्वार अर्धकुंभ में भी लागू करने की तैयारी है। इसी उद्देश्य से यह प्रतिनिधिमंडल प्रयागराज पहुंच रहा है। अधिकारियों की टीम यहां यातायात प्रबंधन प्रणाली, श्रद्धालुओं के लिए बनाई गई सुविधाओं, पार्किंग व्यवस्था, अस्थायी शहर (टेंट सिटी), स्वच्छता मॉडल और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करेगी। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम को भी करीब से समझेगा, जो मेला क्षेत्र में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की रीढ़ साबित हुआ है। प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से क्राउड मैनेजमेंट डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। यह डैशबोर्ड रियल टाइम डेटा के जरिए यह बताता है कि किस सेक्टर में कितनी भीड़ है, कहां अतिरिक्त फोर्स की जरूरत है और कहां डायवर्जन लागू किया जाना चाहिए। स्नान पर्वों के दौरान इसी तकनीक की मदद से बड़े हादसों को टालने में सफलता मिली थी। इसके अलावा, टीम प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग के बीच किए गए सुरक्षा समन्वय का भी विश्लेषण करेगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, खोया-पाया केंद्र, कंट्रोल रूम की व्यवस्था और आपात स्थिति में त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम पर भी अधिकारियों का विशेष फोकस रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल प्रयागराज मेला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे संवाद करेगा और उनके अनुभवों को सुनेगा। यह भी समझा जाएगा कि किन परिस्थितियों में क्या चुनौतियां सामने आईं और उन्हें किस तरह हल किया गया। खासतौर पर भीड़ के दबाव, मौसम की मार और अचानक बढ़ने वाले श्रद्धालुओं की संख्या से निपटने की रणनीति पर मंथन होगा। हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 को लेकर उत्तराखंड सरकार इसे अब तक का सबसे सुव्यवस्थित और तकनीक-सक्षम धार्मिक आयोजन बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रयागराज दौरे के बाद प्रतिनिधिमंडल अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर अर्धकुंभ की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। माना जा रहा है कि प्रयागराज महाकुंभ के सफल मॉडल को अपनाकर हरिद्वार अर्धकुंभ में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, अधिक सुरक्षा और सुगम दर्शन का अनुभव मिल सकेगा। प्रशासन की यह पहल आने वाले समय में बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए एक मजबूत और आधुनिक मॉडल साबित हो सकती है। Post navigation मैं कौशांबी बोल रहा हूं… जिला बना, पहचान नहीं मिली, सपने आज भी अधूरे हैं मानवता की मिसाल बने भाजपा नगर पालिका अध्यक्ष, परिजनों को दी आर्थिक सहायता