विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षणिक चर्चा के दौरान हिंसा का गंभीर मामला सामने आया है। यूजीसी नियमावली, 2026 विषय पर आयोजित एक शांतिपूर्ण परिचर्चा के दौरान दिशा छात्र संगठन से जुड़े छात्रों पर कथित तौर पर संघ समर्थित अराजक तत्वों ने हमला कर दिया। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव का माहौल बन गया है। दिशा छात्र संगठन की ओर से विश्वविद्यालय के बरगद लॉन में यूजीसी नियमावली 2026 को लेकर विचार-विमर्श का आयोजन किया गया था। छात्र संगठन का कहना है कि परिचर्चा पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी और छात्र शैक्षणिक मुद्दों पर अपने विचार रख रहे थे। इसी दौरान भावेश दूबे, विपुल तिवारी, वैभव पांडेय, अनुराग मिश्रा, आयुष दूबे और सम्राट राय के नेतृत्व में करीब 30 से 40 अराजक तत्व मौके पर पहुंचे और परिचर्चा कर रहे छात्रों को घेरना शुरू कर दिया। आरोप है कि इसी बीच विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से बिना नंबर की एक चार पहिया गाड़ी परिसर के भीतर दाखिल हुई, जिस पर “बजरंग दल” लिखा हुआ था। इसके बाद हालात और बिगड़ गए। दिशा छात्र संगठन का आरोप है कि हमलावरों ने छात्रों के साथ गाली-गलौच, जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग और मारपीट शुरू कर दी। छात्र संगठन के अनुसार, हमले के दौरान महिला छात्रों के साथ भी बदसलूकी की गई। आरोप है कि कुछ लड़कियों के बाल पकड़कर उन्हें घसीटा गया और पेट पर लात-घूंसे मारे गए। इस हिंसा में छात्र संजय की नाक से खून बहने लगा, जबकि छात्रा निधि को नाक पर गंभीर चोट आई है। कई अन्य छात्रों को भी चोटें आने की बात कही जा रही है। दिशा छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का कहना है कि जिस विश्वविद्यालय में छात्रों को प्रवेश के समय पहचान पत्र दिखाने और कड़ी जांच से गुजरना पड़ता है, उसी परिसर में एक विशेष संगठन की बिना नंबर की गाड़ी का बेधड़क प्रवेश होना प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाता है। आरोप है कि पूरी घटना के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन मूकदर्शक बना रहा और समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया। छात्रों का कहना है कि जब बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए, तब जाकर हमलावर मौके से फरार हो गए। इसके बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर वहां पहुंचे। आरोप है कि प्रॉक्टर ने हमलावरों को रोकने या उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, मार खाए छात्रों को ही अपने कार्यालय ले गए और कथित गुंडों को वहां से जाने दिया। दिशा छात्र संगठन ने इस घटना को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और लोकतांत्रिक माहौल पर हमला करार दिया है। संगठन का कहना है कि विचार-विमर्श और बहस विश्वविद्यालय की आत्मा होती है, लेकिन इस तरह की हिंसक घटनाएं जानबूझकर स्वस्थ चर्चा के माहौल को खत्म करने की कोशिश हैं। छात्र संगठन ने देशभर के छात्रों, शिक्षकों और इंसाफपसंद नागरिकों से अपील की है कि वे इस कथित गुंडागर्दी के खिलाफ आवाज उठाएं और विश्वविद्यालय परिसरों में जनवादी अधिकारों की बहाली के लिए आगे आएं। संगठन ने मांग की है कि हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। Post navigation UP में SP–Congress का प्लान, क्या हिंदू मतों के बंटवारे से BJP को चुनौती दे पाएगा विपक्ष? मैं कौशांबी बोल रहा हूं… जिला बना, पहचान नहीं मिली, सपने आज भी अधूरे हैं