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यूपी ब्यूरो, नितिन अग्रहरि

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। लोकसभा और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच रणनीतिक तालमेल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अगर सीधा मुकाबला भाजपा से कठिन साबित होता है, तो विपक्ष के पास एक “प्लान B” भी तैयार है। इस प्लान के केंद्र में है—हिंदू वोटों के भीतर विभाजन की रणनीति, ताकि भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके।

प्लान A से प्लान B तक की कहानी

सपा और कांग्रेस का पारंपरिक प्लान A रहा है, पिछड़ा (OBC), दलित और अल्पसंख्यक (MY समीकरण) को मजबूत करना। लेकिन पिछले कुछ चुनावों में यह साफ दिखा कि भाजपा ने इस समीकरण को काफी हद तक तोड़ दिया है। गैर-यादव OBC, गैर-जाटव दलित और शहरी हिंदू मतदाता बड़ी संख्या में भाजपा के साथ खड़े नजर आए।

यहीं से प्लान B की चर्चा शुरू होती है। रणनीतिकारों का मानना है कि अगर भाजपा को हराना है, तो सिर्फ मुस्लिम या यादव वोटों पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा। इसके लिए हिंदू समाज के भीतर मौजूद जातीय, क्षेत्रीय और वर्गीय असंतोष को राजनीतिक रूप देना होगा।

हिंदू वोटों के बंटवारे की रणनीति क्या है?

प्लान B के तहत विपक्ष तीन स्तरों पर काम करता दिख रहा है

पिछड़े बनाम पिछड़े की राजनीति
सपा का फोकस यादवों के साथ-साथ कुर्मी, शाक्य, मौर्य, सैनी, निषाद जैसे OBC वर्गों को फिर से साधने पर है। भाजपा पर आरोप लगाया जा रहा है कि उसने इन वर्गों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं दी।

ठाकुर बनाम गैर-ठाकुर नैरेटिव
योगी सरकार के दौरान प्रशासन और पुलिस में ठाकुर प्रभाव को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। सपा और कांग्रेस इसी असंतोष को हवा देकर गैर-ठाकुर सवर्ण और पिछड़े हिंदुओं को साधने की कोशिश कर रही हैं।

महंगाई, बेरोजगारी और किसान मुद्दे
धार्मिक मुद्दों के बजाय रोज़मर्रा की समस्याओं को हिंदू मतदाताओं से जोड़ने की कोशिश हो रही है। संदेश यह दिया जा रहा है कि “धर्म अलग है, लेकिन पेट और रोजगार की चिंता सबकी एक जैसी है।”

कांग्रेस की भूमिका क्या होगी?

कांग्रेस इस रणनीति में सॉफ्ट हिंदुत्व और संविधान बचाओ जैसे मुद्दों के जरिए अपनी जमीन तलाश रही है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और जाति जनगणना की मांग इसी दिशा में देखी जा रही है। कांग्रेस का लक्ष्य है—शहरी मध्यम वर्ग, ब्राह्मण और दलित हिंदुओं के एक हिस्से को भाजपा से अलग करना।

क्या यह रणनीति भाजपा के लिए खतरा बनेगी?

भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है उसका एकीकृत हिंदू वोट बैंक। राम मंदिर, राष्ट्रवाद और मजबूत नेतृत्व का नैरेटिव अभी भी बड़ी संख्या में मतदाताओं को जोड़ता है। ऐसे में हिंदू वोटों को तोड़ना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा।

हालांकि, अगर

महंगाई लंबे समय तक बनी रहती है

बेरोजगारी का मुद्दा और गहराता है

स्थानीय स्तर पर टिकट बंटवारे से नाराज़गी बढ़ती है

तो कुछ सीटों पर भाजपा को नुकसान हो सकता है।

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