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पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार को दावा किया कि उसने बलूचिस्तान में चल रहे विद्रोह को दबा दिया है। सेना के मुताबिक, आतंकवाद विरोधी अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और इस दौरान 216 विद्रोहियों को मार गिराया गया। हालांकि, इसी दावे के साथ पाक सेना ने विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमलों में मारे गए अपने सैनिकों की संख्या को काफी कम बताया है।

दूसरी ओर, अलग-अलग रिपोर्ट्स और अनुमानों में कहा जा रहा है कि बीएलए के हमलों में कम से कम 100 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। इसी वजह से सेना के आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या सैनिकों की मौत छिपा रहा है पाकिस्तान?

हमारे सहयोगी प्रकाशन टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना जानबूझकर बीएलए के हमलों में हुए नुकसान को कम करके दिखा रही है। इसके पीछे बड़ी वजह फील्ड मार्शल असीम मुनीर को शर्मिंदगी से बचाना बताई जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बलूचिस्तान में मारे गए पाक सैनिकों की असली संख्या सामने आ गई, तो इससे सेना और असीम मुनीर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही, देश के भीतर मुनीर के खिलाफ माहौल बन सकता है, जिसका फायदा विपक्षी राजनीतिक दल उठा सकते हैं।

बेहतरीन हथियारों से लैस हैं बीएलए के लड़ाके

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के विद्रोही केवल संख्या में ही नहीं, बल्कि हथियारों के मामले में भी पाक सेना को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। यह बात खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में स्वीकार की है।

उन्होंने बताया था कि बीएलए का हर लड़ाका करीब 20 हजार डॉलर के आधुनिक सैन्य उपकरणों से लैस है। उनकी राइफलें तक करीब 2,000 डॉलर की बताई जाती हैं। दावा किया जा रहा है कि बीएलए के पास मौजूद हथियार कई मामलों में पाकिस्तानी सैनिकों के हथियारों से भी बेहतर हैं।

बलूच विद्रोहियों की क्या हैं मांगें?

बलूच विद्रोही खुद को अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाला बताते हैं। उनका आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और सेना उनके साथ भेदभाव करती है और उनके संसाधनों का शोषण किया जा रहा है, जिसका फायदा सिर्फ कुछ चुनिंदा सूबों को मिलता है।

बलूच संगठनों ने अपने इलाके में हो रहे विदेशी निवेश का भी विरोध किया है और इसे शोषण करार दिया है। उनका यह भी आरोप है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है और आम नागरिकों को निशाना बनाती है।

कुल मिलाकर, पाक सेना के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ता अंतर बलूचिस्तान संकट को और जटिल बनाता नजर आ रहा है।

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